भगवान होकर भी राम ने निभाई गुरुकुल की मर्यादा— सिमराही में श्रीराम कथा में मुरलीधर जी महाराज का दिव्य प्रवचनमर्यादा और विनय ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म — श्री मुरलीधर जी महाराज