Report: A.k Chaudhary
माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला नरक निवारण चतुर्दशी पर्व धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक विश्वास का प्रतीक माना जाता है। शनिवार को इस पावन अवसर पर प्रखंड क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने जिले के राघोपुर प्रखंड क्षेत्र के प्रसिद्ध बाबा भीमशंकर महादेव मंदिर में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर व्रत का शुभारंभ किया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ देखी गई। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा शिवालय भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
नरक निवारण चतुर्दशी के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रखंड क्षेत्र के गोसपुर निवासी विद्वान पंडित आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि इस व्रत का उद्देश्य मनुष्य को पापों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करना है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक उपवास रखकर भगवान शिव की आराधना करने से नरक के कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

पंडित मिश्र के अनुसार, नरक निवारण चतुर्दशी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद संकल्प लेकर व्रत आरंभ करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव की पूजा कर शारीरिक, मानसिक एवं दैविक कष्टों से मुक्ति की कामना करनी चाहिए। पूजन के दौरान गंगाजल, अक्षत, तिल, यव और पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। पंचामृत में दूध, दही, घी, मधु और गुड़ का प्रयोग विशेष फलदायी बताया गया है।
उन्होंने आगे बताया कि आक के पुष्प, बिल्वपत्र, धतूरा, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर भगवान शिव की आराधना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। पूजन के पश्चात शिव सहस्रनाम का पाठ करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।







