Report: A.K Chaudhary
एक ओर सरकार विकास योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की लगातार बात करती है, वहीं दूसरी ओर जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत रामविसनपुर पंचायत में बन रहे पंचायत सरकार भवन का निर्माण कार्य कई सवालों के घेरे में आ गया है। निर्माण स्थल पर सामने आई स्थितियां सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को उजागर करती नजर आ रही हैं।

जानकारी के अनुसार पंचायत सरकार भवन का निर्माण कार्य इन दिनों तेजी से जारी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्थल पर अब तक शिलापट्ट तक नहीं लगाया गया है। सामान्यतः किसी भी सरकारी योजना के तहत होने वाले निर्माण कार्य में योजना का नाम, स्वीकृत राशि, निर्माण एजेंसी, कार्य अवधि एवं संबंधित विभाग की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य माना जाता है, ताकि आम लोगों को परियोजना की जानकारी मिल सके। मगर यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं दिखी, जिससे योजना की लागत और स्वीकृति से जुड़ी जानकारी पूरी तरह अस्पष्ट बनी हुई है।

मौके पर पहुंची न्यूज एक्सप्रेस बिहार की टीम ने जब निर्माण कार्य का जायजा लिया तो भवन निर्माण में प्रयुक्त सामग्री को लेकर भी सवाल खड़े हुए। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण में लाल ईंट का प्रयोग किया जा रहा है, जबकि बालू एवं गिट्टी की गुणवत्ता भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण सामग्री मानक के अनुरूप नहीं हुई तो भविष्य में भवन की मजबूती और टिकाऊपन प्रभावित हो सकता है, जिससे सरकारी धन की बर्बादी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

मामले में जब संवेदक सुभाष कुमार से फोन पर संपर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने किसी भी तरह की विस्तृत जानकारी देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि योजना से संबंधित जानकारी के लिए जिला पदाधिकारी (डीएम) से संपर्क किया जाए। संवेदक के इस जवाब ने मामले को और भी संदेह के घेरे में ला दिया है, क्योंकि आमतौर पर कार्य एजेंसी द्वारा योजना से जुड़ी मूलभूत जानकारी साझा की जाती है।

पूरे घटनाक्रम ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं— बिना शिलापट्ट लगाए निर्माण कार्य कैसे जारी है?, पंचायत सरकार भवन के निर्माण की कुल लागत कितनी है?, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है?, संबंधित विभाग द्वारा कार्य की नियमित जांच की जा रही है या नहीं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत सरकार भवन आम जनता की सुविधा के लिए बनाया जा रहा है, ऐसे में इसकी गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।







