Report: A.K Chaudhary
राघोपुर प्रखंड अंतर्गत गणपतगंज स्थित हरावत राज उच्च विद्यालय का मैदान रविवार को शिवमय हो उठा, जब यहां एक दिवसीय भव्य शिव गुरु महोत्सव का आयोजन किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने लगी थी और दोपहर तक पूरा पंडाल खचाखच भर गया। आयोजन स्थल पर “नमः शिवाय” के जयघोष और भक्ति गीतों से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।

महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शिव शिष्या बरखा आनंद तथा शिव शिष्य अर्चित आनंद (अन्नू बाबू) पहुंचे। उनके आगमन पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ स्वागत किया। आयोजन में कोसी, सीमांचल, मिथलांचल के सभी जिले के अलावा मुजफ्फरपुर, रांची सहित पड़ोसी देश नेपाल से श्रद्धालु शामिल हुए। आयोजन समिति के अनुसार लगभग एक लाख से अधिक लोग शिव चर्चासुनने पहुंचे।

महीने भर चली तैयारियां
आयोजन को सफल बनाने के लिए सुपौल जिला के शिव शिष्य परिवार के सैकड़ों सदस्य करीब एक माह से तैयारी में जुटे थे। विशाल पंडाल, मंच सज्जा, ध्वनि व्यवस्था, पेयजल, ट्रैफिक व्यवस्था, अस्थायी शौचालय और चिकित्सा शिविर की व्यवस्था की गई थी। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग स्थल भी निर्धारित किया गया था।

सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था चाक-चौबंद
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राघोपुर पुलिस बल के साथ आयोजन समिति के स्वयंसेवक चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए अलग से टीम बनाई गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। चिकित्सा सहायता के लिए प्राथमिक उपचार केंद्र भी सक्रिय रहा।

अर्चित आनंद का संदेश: “तीन सूत्र अपनाइए, जीवन बदलिए”
शिव चर्चा के दौरान अर्चित आनंद ने कहा कि शिव ही जगत गुरु हैं और साहब हरिन्द्रानंद ने अपने बाल्यकाल से वर्षों तक साधना कर शिव संदेश को जन-जन तक पहुंचाया। उन्होंने तीन सूत्रों पर विशेष बल देते हुए कहा कुछ न लेना है, न देना है। “नमः शिवाय” से प्रणाम करना है और दया की याचना करनी है। दूसरों को भी बताना है कि शिव मेरे गुरु हैं। उन्होंने कहा कि कोसी क्षेत्र से ही शिव चर्चा की शुरुआत हुई थी और इसी जिले की मिट्टी सर्वप्रथम चढ़ाई गई थी। यदि कोई व्यक्ति इन तीन सूत्रों का ईमानदारी से पालन करता है तो उसके जीवन में निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन आता है। उन्होंने कहा कि आज इस मैदान में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि शिव चर्चा ने लोगों के जीवन की दिशा बदल दी है।

बरखा आनंद ने याद दिलाया 1991 का पहला महोत्सव
शिव शिष्या बरखा आनंद ने कहा कि वर्ष 1991 में सुपौल जिले के गड़बरुआरी में पहला शिव गुरु महोत्सव आयोजित हुआ था, जिसमें मात्र 13 लोग शामिल हुए थे। आज वही आयोजन करोड़ो लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि गुरु का आदेश है—पहले स्वयं शिव का शिष्य बनें और फिर दूसरों को भी प्रेरित करें। गुरु की वाणी और मंत्र जप के माध्यम से मन में शिव का वास होता है। उन्होंने कहा कि बिना गुरु कृपा के कोई भी साधना पूर्णता को प्राप्त नहीं करती। कहा कि आज का यह आयोजन पूर्ण रूप से सफल आयोजन है।
आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा माहौल
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालु मंत्रोच्चार, भजन और ध्यान में लीन दिखाई दिए। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी रही। कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ पहुंचे थे। मंच से लगातार व्यवस्था संबंधी घोषणाएं की जाती रहीं ताकि भीड़ में अनुशासन बना रहे।

समापन के बाद लगा जाम
महोत्सव समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एक साथ निकलने से मुख्य सड़क पर कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस बल और स्वयंसेवकों ने तत्परता दिखाते हुए यातायात को नियंत्रित कर लिया।

20 वर्षों बाद इतना बड़ा आयोजन
आयोजन समिति के अनुसार लगभग 20 वर्षों के बाद सुपौल जिले में इस स्तर का शिव गुरु महोत्सव आयोजित हुआ है। श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि कोसी क्षेत्र में शिव गुरु परंपरा के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ रही है।
कुल मिलाकर गणपतगंज का यह शिव गुरु महोत्सव धार्मिक आस्था, अनुशासन और सामूहिक सहभागिता का ऐतिहासिक उदाहरण बन गया, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है।







