Report: A.K Chaudhary
बिहार सरकार ने राज्य में बेहतर पुलिसिंग, अपराध नियंत्रण और नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। गृह विभाग के निर्देश पर सुपौल जिले के सात प्रमुख थानों को अब पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) रैंक थाना घोषित कर दिया गया है। इस आदेश के बाद इन थानों में अब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी थानाध्यक्ष के रूप में पदस्थापित किए जाएंगे। सरकार के इस फैसले को जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जारी अधिसूचना के अनुसार सुपौल, राघोपुर, त्रिवेणीगंज, निर्मली, वीरपुर, पिपरा और छातापुर थाना को इंस्पेक्टर रैंक का दर्जा दिया गया है। अब इन सभी थानों की कमान पुलिस निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के हाथों में होगी। इससे थाना संचालन, अपराध अनुसंधान, विधि-व्यवस्था की निगरानी और प्रशासनिक कार्यों में अधिक दक्षता आने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि जिन थानों का क्षेत्रफल बड़ा है, जहां जनसंख्या अधिक है अथवा जो अपराध की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं, वहां इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी की तैनाती से पुलिसिंग अधिक प्रभावी होगी। इससे गंभीर मामलों की जांच की गुणवत्ता बेहतर होगी, अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी तथा लंबित मामलों के निष्पादन में भी तेजी आएगी।
नए आदेश के तहत थानाध्यक्ष अपने अधीन कार्यरत अनुसंधान शाखा और विधि-व्यवस्था इकाई की अधिक प्रभावी निगरानी कर सकेंगे। इससे अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस प्रशासन की जवाबदेही भी बढ़ेगी। स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील परिस्थितियों से निपटने में भी यह व्यवस्था अधिक कारगर साबित होगी।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) जैसे नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए थानों को प्रशासनिक रूप से अधिक सक्षम बनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से पूरे बिहार में बड़े पैमाने पर थानों को इंस्पेक्टर रैंक का दर्जा दिया गया है।
बिहार में वर्तमान में कुल 1382 पुलिस थाने अधिसूचित हैं। पहले इनमें से केवल 208 थाने ही इंस्पेक्टर रैंक के थे। अब सरकार ने 217 अतिरिक्त थानों को भी इस श्रेणी में शामिल कर लिया है। इसके बाद राज्य में कुल 425 सामान्य पुलिस थानों में इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी थानाध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे।
गृह विभाग का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे सुपौल सहित पूरे बिहार में पुलिस व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी, अपराध नियंत्रण को नई गति मिलेगी और आम लोगों को बेहतर पुलिस सेवा उपलब्ध हो सकेगी।







