News Desk Araria:
भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 10 किलोमीटर के दायरे में अवैध निर्माण और संदिग्ध घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीमा क्षेत्र में किए गए अवैध कब्जों और निर्माणों को चिन्हित कर शीघ्र ध्वस्त किया जाएगा तथा अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

अररिया जिले के सिकटी प्रखंड स्थित लेटी एसएसबी कैंप में लगभग 170 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि जहां सीमा पर बाड़ नहीं है, वहां सुरक्षा एजेंसियों के सामने अतिरिक्त चुनौतियां उत्पन्न होती हैं। ऐसे क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
गृह मंत्री ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया कि सीमा क्षेत्र में सक्रिय प्रत्येक घुसपैठिए की पहचान कर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि केवल मतदाता सूची से नाम हटाना पर्याप्त समाधान नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे। घुसपैठ का असर केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह राशन वितरण, रोजगार के अवसर और सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित करता है।

उन्होंने पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस विषय पर केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न मंत्रालयों की सहभागिता से एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। यह समिति सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करने और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार करेगी।
सीमांचल क्षेत्र में चल रही अधोसंरचना परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि 532 किलोमीटर लंबी सीमा सड़क परियोजना को 18 हिस्सों में विभाजित किया गया है, जिनमें से 14 खंडों का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष चार खंडों पर तेजी से काम जारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बचे हुए हिस्सों को भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है।

कार्यक्रम के बाद गृह मंत्री अररिया समाहरणालय पहुंचे, जहां उन्होंने सात सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। इस बैठक में एसएसबी, गृह मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। बैठक के दौरान सीमा प्रबंधन को मजबूत करने, अवैध निर्माण पर रोक लगाने और घुसपैठ की घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सूचना तंत्र को अधिक सशक्त बनाया जाए और सीमा क्षेत्र में निरंतर निगरानी रखी जाए। साथ ही, वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती गांवों के समग्र विकास पर बल देते हुए उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ समन्वय बढ़ाने की बात कही। गृह मंत्री ने कहा कि यदि गांवों के साथ विश्वास और सहयोग का संबंध मजबूत होगा तो नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध घुसपैठ और अन्य राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
सरकार का लक्ष्य है कि सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास साथ-साथ आगे बढ़ें, ताकि सीमावर्ती जिलों में रहने वाले नागरिकों को सुरक्षित वातावरण और बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।







