नीतीश कुमार के बेटे निशांत कल जदयू में होंगे शामिल, सियासी गलियारों में तेज हुई हलचल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार 7 मार्च को औपचारिक रूप से जनता दल (यू) की सदस्यता लेंगे। उनकी राजनीतिक एंट्री को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

News Desk Patna:

बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। गर्मी के मौसम के साथ-साथ सियासी तापमान भी बढ़ता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव मैदान में उतरने और उनके पुत्र निशांत कुमार के राजनीति में सक्रिय होने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक निशांत कुमार 7 मार्च को औपचारिक रूप से जनता दल (यूनाइटेड) की सदस्यता लेंगे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सदस्यता ग्रहण करने के बाद उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि पार्टी से जुड़ने के बाद निशांत कुमार बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा कर कार्यकर्ताओं और नेताओं से मुलाकात करेंगे, जिससे संगठन को और मजबूत करने की रणनीति बनाई जा सके।

इधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद वे बिहार विधान परिषद की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। परिषद में उनका कार्यकाल वर्ष 2030 तक है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में पूरी तरह उतरते हैं तो उन्हें परिषद में नीतीश कुमार के शेष कार्यकाल के लिए मौका मिल सकता है।

जदयू के भीतर एक बड़ा वर्ग यह भी चाहता है कि भविष्य में पार्टी की कमान निशांत कुमार को सौंपी जाए। इसे देश के कई क्षेत्रीय दलों में देखने को मिलने वाली उस परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेता के बाद उनके परिवार के सदस्य को नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलती है।

दूसरी ओर, नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद बिहार में अगले मुख्यमंत्री को लेकर भी अटकलों का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार नई सरकार में मुख्यमंत्री पद भारतीय जनता पार्टी के हिस्से में जा सकता है। संभावित दावेदारों में सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय और दिलीप जायसवाल के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में बिहार की नई राजनीतिक व्यवस्था की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। सूत्रों की मानें तो गठबंधन की रणनीति के तहत जनता दल (यू) से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना पर भी विचार चल रहा है। इन घटनाक्रमों ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर बेहद दिलचस्प बना दिया है और सभी की नजरें अब आगे होने वाले फैसलों पर टिकी हुई हैं।

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