बिहार से रोजगार की तलाश में गया युवक नागपुर में ट्रेन से गिरकर मरा, राजद नेता बोले – यह सिर्फ हादसा नहीं, सरकार की रोजगार नीति की विफलता है

न्यूज डेस्क सुपौल:

बिहार के सुपौल जिले से एक बार फिर रोजगार की तलाश में गए युवक की मौत ने प्रवासी मजदूरों की असुरक्षा और सरकारी नीतियों की विफलता को उजागर कर दिया है। करजाइन थाना क्षेत्र के बसवानपट्टी गांव निवासी 23 वर्षीय नीरज कुमार की नागपुर में ट्रेन से गिरने के कारण दर्दनाक मौत हो गई।

नीरज कुमार कुछ बेरोजगार साथियों के साथ बेंगलुरु में रोजगार की तलाश में जा रहा था। 23 जुलाई को नागपुर स्टेशन पर वह ट्रेन से गिर पड़ा, जिससे उसके दोनों पैर कट गए। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शनिवार को जब नीरज का शव एम्बुलेंस से उसके गांव पहुंचा, तो कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है। तीन भाइयों में सबसे बड़ा नीरज ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाता था। उसकी मौत से परिवार की आर्थिक रीढ़ टूट चुकी है।

घटना की जानकारी मिलते ही राजद नेता और सुपौल लोकसभा क्षेत्र के संभावित प्रत्याशी बैद्यनाथ मेहता मृतक के घर पहुंचे और परिजनों को ढाढ़स बंधाया। उन्होंने इस घटना पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि बिहार सरकार की रोजगार विफलता ही नीरज की मौत की असली वजह है।

बैद्यनाथ मेहता ने कहा, “अगर बिहार में उद्योग और रोजगार के अवसर होते, तो नीरज जैसे युवा अपने घर से दूर जाने को मजबूर नहीं होते। सरकार पलायन में कमी के झूठे आंकड़े पेश कर रही है, लेकिन क्या उसके पास इसका कोई विश्वसनीय मापदंड है?”

उन्होंने मांग की कि राज्य से बाहर जाने वाले प्रत्येक प्रवासी मजदूर का सरकारी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाए और कम से कम 20 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने प्रवासी मजदूरों के लिए एक विशेष सहायता कोष गठित करने की मांग भी उठाई।

बिहार से हर साल लाखों युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं, लेकिन काम के दौरान जान गंवाने पर उनके परिवारों को न तो मुआवजा मिलता है और न ही कोई सरकारी सहायता।

नीरज की मौत अब केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि बिहार में स्थानीय रोजगार के अभाव और सरकारी उदासीनता की भयावह तस्वीर बन चुकी है। जब तक राज्य में सम्मानजनक और सुरक्षित रोजगार की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक हर ‘नीरज’ पलायन की इस त्रासदी का शिकार बनता रहेगा।

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