सुपौल: ब्रह्माकुमारीज का भव्य आयोजन, वरिष्ठ नागरिकों को तनावमुक्त व सकारात्मक जीवन का संदेश, राजयोग मेडिटेशन के साथ चैतन्य झांकी में मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

Report: A.K. Chaudhary

सुपौल जिले के सिमराही स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ओम शांति भवन के सभागार में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण, सम्मानपूर्ण जीवन, तनावमुक्त रहने एवं सकारात्मक जीवनशैली को लेकर एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्रीय प्रभारी राजयोगिनी रंजू दीदी, स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी बबीता दीदी, सिमराही नगर पंचायत की मुख्य पार्षद यशोदा देवी, ब्रह्माकुमारीज संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू, राजस्थान से आए बीके भगवान भाई, समाजसेवी परमेश्वरी सिंह यादव, वरिष्ठ व्यवसायी अनिल महतो, बिनीता देवी एवं बीके किशोर भाई सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज संस्थान के माउंट आबू मुख्यालय से आए बीके भगवान भाई ने कहा कि मन में लगातार चलने वाले नकारात्मक विचार वर्तमान समय में अनेक समस्याओं का कारण बनते हैं। नकारात्मक विचारों से ही तनाव उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि क्षणिक क्रोध और आवेश में लिया गया निर्णय व्यक्ति से ऐसी भूल करवा सकता है, जिसका बाद में लंबे समय तक पश्चाताप रहता है। उन्होंने कहा कि क्रोध से मानसिक तनाव बढ़ता है और मनुष्य का विवेक प्रभावित होता है। क्रोध के कारण मनोबल एवं आत्मबल कमजोर हो जाता है तथा कई बार यही अपराधों का मूल कारण भी बन जाता है। इसलिए तनाव से मुक्ति के लिए सकारात्मक विचारों को जीवन में अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता सकारात्मक विचारों का प्रमुख स्रोत है और राजयोग के माध्यम से मन को शांत एवं स्थिर रखने का अभ्यास किया जा सकता है।

विचारों से बनता है व्यक्ति का दृष्टिकोण और व्यवहार

क्षेत्रीय प्रभारी राजयोगिनी रंजू दीदी ने कहा कि सकारात्मक रहने से हर समस्या का समाधान निकालने की क्षमता विकसित होती है। बुराई में भी अच्छाई देखने का प्रयास करने से मन पर नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मन में चलने वाले विचारों से ही स्मृति, वृत्ति, भावना, दृष्टिकोण और व्यवहार का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि यदि मन के विचार नकारात्मक होंगे तो स्मृति, दृष्टि, वृत्ति, भावना और व्यवहार भी नकारात्मक होने लगेंगे। इससे तनाव पैदा होता है। मन के विचार ही वास्तव में बीज के समान हैं। विचार सकारात्मक होंगे तो उसका प्रभाव भी जीवन में सकारात्मक दिखाई देगा।

बीके भगवान भाई ने बताया कि इस वर्ष की थीम ‘आध्यात्मिक सशक्तिकरण द्वारा स्वस्थ एवं सुखी समाज’ रखी गई है। इसके तहत लोगों को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जीवन में अध्यात्म के महत्व, राजयोग मेडिटेशन तथा स्वस्थ एवं सुखी समाज के निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका के बारे में जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता को जीवन में अपनाने से समाज को स्वस्थ और सुखी बनाने में मदद मिल सकती है। विकारों के वश में होने से तनाव उत्पन्न होता है, इसलिए स्वयं को विकारों से बचाना आवश्यक है।

राजयोग मेडिटेशन कराया गया

कार्यक्रम के दौरान बीके भगवान भाई का पट्टा पहनाकर एवं फूलों की माला से सम्मान किया गया। इसके बाद उन्होंने उपस्थित लोगों को मनोबल एवं आत्मबल बढ़ाने के उद्देश्य से राजयोग मेडिटेशन कराया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने राजयोग के माध्यम से मन को शांत एवं सकारात्मक रखने का अभ्यास किया।

चैतन्य झांकी के साथ मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

इसी क्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ओम शांति भवन सभागार में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में भव्य एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्री राधा-कृष्ण की चैतन्य झांकी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही।

इस दौरान अतिथियों ने बाल कृष्ण को माखन खिलाया, झूला झुलाया तथा मटका फोड़कर जन्माष्टमी का उल्लास मनाया। कार्यक्रम में श्रीकृष्ण के दिव्य चरित्र, आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति के संदेश को लोगों तक पहुंचाया गया। चैतन्य झांकी के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।

कार्यक्रम में मौके पर उप मुख्य पार्षद विनीता देवी, बैजनाथ भगत, भुवनेश्वरी यादव, उपेंद्र यादव, भूदेव दास, विद्यानंद दास, पूर्व प्रमुख विनय वर्धन, रामफल शाह, रवि कुमार, राजकुमार चाद, अरुण जायसवाल, अनिल महतो, उपेंद्र महतो, ब्रह्माकुमारी पूजा बहन, सुमन बहन, रेणु बहन, बिना बहन, ललिता देवी, अवध मेहता, शांति देवी सहित सैकड़ों श्रद्धालु एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

Leave a Comment

[democracy id="1"]