कृष्ण-सुदामा की मित्रता और परीक्षित मोक्ष प्रसंग के साथ भागवत कथा का हुआ समापन

धरहारा में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन गुरुवार को हुआ, जिसमें कृष्ण-सुदामा की मित्रता और राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग का वर्णन किया गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच हवन-पूजन और पूर्णाहुति के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

Report: A.K Chaudhary

सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड के धरहारा वार्ड संख्या 13 में शिवनंदन चौधरी के आवास पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हो गया। अंतिम दिन कथा में भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अतुलनीय मित्रता के साथ-साथ राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया।

कथा सुनाते कथावाचक श्री रविन्द्र शास्त्री जी

कथावाचक श्री रविन्द्र शास्त्री जी महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता त्याग, समर्पण और सच्चे प्रेम का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सुदामा की निर्धनता के बावजूद उनकी भक्ति और सच्ची भावना से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अपार वैभव प्रदान किया। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्चे मन से की गई भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती।

इसके साथ ही कथा में राजा परीक्षित के मोक्ष का प्रसंग सुनाते हुए महाराज ने कहा कि मृत्यु निश्चित होने के बावजूद उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर मोक्ष प्राप्त किया। यह दर्शाता है कि भागवत कथा मानव जीवन को पवित्र बनाकर उसे ईश्वर की प्राप्ति की ओर ले जाती है।

अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे और पूरे पंडाल में भक्ति का माहौल बना रहा। कथा समापन के अवसर पर हवन-पूजन और पूर्णाहुति का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भाग लेकर सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजक शिवनंदन चौधरी ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और कथा में शामिल हुए भक्तों के प्रति आभार व्यक्त किया। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण का संचार किया और लोगों को धर्म व भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

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