रेल बजट में बिहार को ऐतिहासिक बढ़त: 10,379 करोड़ का आवंटन, हाई-स्पीड रेल और नेटवर्क विस्तार को मिली रफ्तार

News Desk Hajipur:

रेल बजट 2026 में बिहार को रेलवे विकास के क्षेत्र में बड़ी प्राथमिकता दी गई है। केंद्र सरकार ने इस वर्ष बिहार के लिए 10,379 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की है, जो राज्य के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति देने वाली मानी जा रही है।

रेल मंत्री की बजट पश्चात प्रेस ब्रीफिंग के बाद ईस्ट सेंट्रल रेलवे (ईसीआर) के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने हाजीपुर स्थित जोनल मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए इस आवंटन से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बिहार के रेल बजट में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

छत्रसाल सिंह के अनुसार वर्ष 2009 से 2014 के बीच बिहार को रेलवे विकास के लिए औसतन 1,132 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष मिलते थे, जबकि अब यह राशि लगभग नौ गुना बढ़कर 10,379 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि बीते 11 वर्षों में बिहार में करीब 2,000 किलोमीटर नई रेलवे लाइनें बिछाई गई हैं, जिससे राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों तक रेल संपर्क मजबूत हुआ है।

रेलवे नेटवर्क के विस्तार का सीधा लाभ यात्रियों के साथ-साथ व्यापार, उद्योग और माल ढुलाई क्षेत्र को भी मिलेगा। इसके साथ ही रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होने की संभावना जताई गई है।

दीर्घकालिक परिवहन नीति के तहत रेलवे ने पर्यावरण के अनुकूल और तेज यात्री परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की योजना की घोषणा की है। इनमें दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी कॉरिडोर को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है।

रेलवे अधिकारियों ने जानकारी दी कि वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के बन जाने से यात्रा समय में बड़ी कटौती होगी। इस रूट पर सफर महज करीब 2 घंटे 55 मिनट में पूरा किया जा सकेगा, जिससे उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

रेलवे का दावा है कि इन परियोजनाओं से मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे यात्रियों को निर्बाध और सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिल सकेगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार में रेलवे ढांचे को और सशक्त बनाने के लिए आने वाले वर्षों में कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाएगा।

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