सुपौल: स्कूल में एमडीएम का खाना को लेकर हंगामा, अधिकारी के पहुंचने और समुचित आश्वासन के बाद शांत हुआ मामला

रिपोर्ट: अमरेश कुमार|सुपौल

जिले के पिपरा प्रखंड क्षेत्र के बनवारी मध्य विद्यालय थुमहा में मंगलवार को एनजीओ द्वारा दी जाने वाली मध्यान भोजन में गुणवत्तापूर्ण खाना नहीं दिए जाने से नाराज स्कूल के बच्चों ने खाना खाने से इन्कार कर प्रदर्शन किया। बच्चों के अभिभावकों को जब पता चला कि स्कूल में आया और आरोप लगाया कि खाना में बने आलू सोयाबीन सब्जी में सिर्फ पानी ही पानी था। जिसके बाद इसकी शिक़ायत एमडीएम डीपीओ सुपौल पिपरा बीडीओ और एमडीएम बीआरपी से की गई।

सूचना मिलने पर पहुंचे साधन सेवी मनोज कुमार गुप्ता एनजीओ का समर्थन करते हुए कहने लगा कि हम भी खाना खाएंगे और बच्चों को भी खाना खाना होगा लेकिन पानी छलक रहे सब्जी से आ रही बदबू देख स्कूल के बच्चों ने खाना खाने से मना कर दिया। इसी बीच बीडीओ शिवेश कुमार सिंह भी विद्यालय पहुंचे और ख़ाना देख भड़क उठे और साधन सेवी को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि खाना में सुधार करवाइए नहीं तो कारवाई होगी। कहा कि विद्यालय में दी जा रही खराब गुणवत्ता की खाना के संबंध में साधन सेवी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। जिसके बाद साधन सेवी मनोज गुप्ता ने एनजीओ प्रतिनिधि जितेन्द्र यादव से बात कर दोबारा सब्जी मंगवाया गया और बच्चों को भोजन करवाया गया। हेडमास्टर प्रशान्त कुमार ने कहा स्कूल में खाना आया हम खाना नहीं चखें थे कि इसी बीच कुछ ग्रामीणों ने विद्यालय आकर खाना देखा तो पता चला कि खाना घटिया है। इसी बात को लेकर कुछ बच्चों के अभिभावकों ने वरीय अधिकारियों से शिकायत की जिसके बाद एमडीएम डीपीओ रहमानी भी विद्यालय पहुंचे और हेडमास्टर को खाना नहीं चखने को लेकर कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि विद्यालय में खाना आया तो आप क्यों नहीं चखें यह आपकी लापरवाही है। रसोइया से कहकर खाना मंगवाया और वो भी कुछ लोगों के साथ खाना खाया। साथ में खा रहे लोग खाना से संतुष्ट नहीं हुए लेकिन डीपीओ साहब ने कहा खाना सामान्य है इसमें सुधार की जरूरत है। वहीं भोजन करने के बाद डीपीओ नेबपढ़ाई कर रहे बच्चों से शिक्षा से संबंधित फिडबेक लिए बच्चों से कई सवाल भी किए जिसका जबाब भी छात्रों ने दिया।

मौके पर विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष रविन्द्र कुमार रवि, संजय कुमार मंडल, अनुराग आनंद, रंजीत साह, अनिल कुमार, सुरेश ठाकुर, जगरनाथ चौधरी सहित अन्य मौजूद थे।

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