Report: A.K. Chaudhary
सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार को सुपौल के लहटन चौधरी सभागार में प्रधानमंत्री राहत (PM RAHAT) योजना को लेकर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिला प्रशासन और जिला परिवहन कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में अस्पतालों, पुलिस और संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण दिया गया।

योजना के तहत निर्धारित पात्रता एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार सड़क दुर्घटना में घायल पात्र व्यक्तियों को अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। यह सुविधा योजना की शर्तों के अधीन दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों की निर्धारित अवधि तक मिलेगी। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक परेशानी के कारण घायल व्यक्ति के इलाज में होने वाली देरी को रोकना है।
सुपौल के 18 सरकारी और निजी अस्पतालों में मिलेगी सुविधा
कार्यशाला में जानकारी दी गई कि सुपौल जिले के कुल 18 अस्पतालों में योजना के तहत कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इनमें 10 सरकारी और आठ निजी अस्पताल शामिल हैं। अस्पताल प्रबंधन को पात्र मरीजों का पंजीकरण करने, आवश्यक विवरण दर्ज करने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपचार संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने का निर्देश दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान अस्पतालों को पोर्टल पर पंजीकरण, दुर्घटना पीड़ितों का विवरण दर्ज करने तथा पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इसके लिए TMS 2.0 और eDAR पोर्टल के संचालन का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया गया।
अस्पताल और पुलिस की भूमिका होगी अहम
कार्यशाला में बताया गया कि योजना का लाभ पात्र दुर्घटना पीड़ितों तक पहुंचाने के लिए अस्पतालों, पुलिस और परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। पुलिस को दुर्घटना से संबंधित जानकारी eDAR पोर्टल पर दर्ज करने, आवश्यक सत्यापन करने और अस्पतालों के साथ समन्वय बनाए रखने की प्रक्रिया समझाई गई।
वहीं, अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया गया कि पात्र दुर्घटना पीड़ितों के उपचार में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। अस्पतालों के नोडल पदाधिकारियों और तकनीकी कर्मियों को भी योजना के संचालन से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई।
24 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचना जरूरी
योजना के प्रावधानों के अनुसार, दुर्घटना की तारीख से 24 घंटे के भीतर अस्पताल में पहली बार भर्ती होने की शर्त लागू है। ऐसे में दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना महत्वपूर्ण है। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि सड़क दुर्घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने पर तत्काल 112 पर सूचना दें और जरूरत के अनुसार एम्बुलेंस की सहायता लें।
कार्यशाला में सिविल सर्जन, जिला परिवहन पदाधिकारी, पुलिस एवं यातायात पुलिस के प्रतिनिधि, जिला आयुष्मान नोडल पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, सरकारी और निजी अस्पतालों के निदेशक, अधीक्षक एवं प्रबंधक सहित संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सिविल सर्जन ने अस्पताल प्रबंधन को योजना के प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। वहीं, जिला पदाधिकारी ने कहा कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विभागों और अस्पतालों से योजना के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आम लोगों के बीच इसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।







