मैंने जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा, NEET विवाद के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, पत्र में बताई वजह

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। त्यागपत्र में उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य, देश की एकता और राष्ट्र विरोधी ताकतों को माहौल का फायदा उठाने से रोकने के लिए उन्होंने यह निर्णय लिया। पत्र में उन्होंने NEET-UG 2026 विवाद, परीक्षा सुधार और अपनी जिम्मेदारी का भी विस्तार से उल्लेख किया।

News Desk:

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए अपने त्यागपत्र में उन्होंने कहा है कि देशभर में हाल के दिनों में बनी परिस्थितियों और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जंतर-मंतर और देशभर में चल रहे घटनाक्रम का लाभ राष्ट्र विरोधी ताकतें न उठा सकें तथा छात्र कानूनी विवादों में उलझने के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि वे पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि एक मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही विकसित भारत की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं और सपनों का सम्मान करना उनके सार्वजनिक जीवन का नैतिक दायित्व रहा है।

उन्होंने पत्र में वर्ष 2026 की NEET-UG परीक्षा का भी उल्लेख किया। प्रधान ने लिखा कि 3 मई 2026 को आयोजित परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं के बाद केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया। साथ ही अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने का फैसला भी लिया गया।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना थी। इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, अभिभावकों और छात्रों के सहयोग से 21 जून 2026 को सफलतापूर्वक पुनः परीक्षा आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई को घोषित परिणाम संतोषजनक रहे और गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले कई प्रतिभाशाली छात्रों को भी सफलता मिली।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि पहले दिन से उन्होंने इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी भी इससे मुंह नहीं मोड़ा। उनका संकल्प था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया के कारण प्रभावित नहीं होने देंगे और किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और बाधाएं उत्पन्न करने का प्रयास किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा।

अपने इस्तीफे के कारण स्पष्ट करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा, “देश की युवाशक्ति ही भारत की असली ताकत है। मैं नहीं चाहता कि जंतर-मंतर और देशभर में बने हालात का फायदा राष्ट्र विरोधी ताकतें उठाएं। देश की एकता बनी रहे, भारत का कोई भी छात्र कानूनी पचड़ों में न उलझे और अपने करियर पर ध्यान दे, इसी उद्देश्य से मैंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेजा है।”

पत्र के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का धन्यवाद देते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और आगे भी वे इसी भावना से देश की सेवा करते रहेंगे।

Leave a Comment

[democracy id="1"]