बिहार में डेढ़ करोड़ राशन लाभुकों पर संकट, 31 मार्च तक पूरा करे ये काम नही तो बंद हो जाएगा राशन

बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन लेने वाले करीब डेढ़ करोड़ लाभुकों का ई-केवाईसी अभी भी लंबित है। राज्य सरकार ने अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 मार्च कर दी है और चेतावनी दी है कि तय समय तक ई-केवाईसी नहीं कराने पर लाभुकों का राशन बंद किया जा सकता है।

News Desk Patna:

बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन लेने वाले लाभुकों के लिए ई-केवाईसी कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बावजूद राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे राशन कार्डधारी हैं जिनका सत्यापन अभी तक नहीं हो सका है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के हालिया आंकड़ों के अनुसार लगभग डेढ़ करोड़ लाभुकों का ई-केवाईसी अभी भी लंबित है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 मार्च कर दी है और सभी जिलों के अधिकारियों को विशेष अभियान चलाकर इसे पूरा करने का निर्देश दिया है।

विभागीय जानकारी के अनुसार बिहार में कुल लगभग 8 करोड़ 20 लाख लोग राशन योजना का लाभ ले रहे हैं। इनमें करीब 18 प्रतिशत यानी लगभग डेढ़ करोड़ लाभुकों का ई-केवाईसी अभी बाकी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर ई-केवाईसी नहीं कराने वाले लाभुकों को आगे चलकर खाद्यान्न योजना के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है।

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ई-केवाईसी की प्रक्रिया को तेज करने के लिए जिलों के सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। पहले इसके लिए 15 फरवरी तक का समय निर्धारित किया गया था। बाद में प्रगति संतोषजनक नहीं होने पर इसे बढ़ाकर 28 फरवरी किया गया, लेकिन तब भी लक्ष्य पूरा नहीं होने के कारण अब अंतिम तिथि 31 मार्च तय की गई है।

विभाग के मुताबिक कई जिलों में ई-केवाईसी का काम अपेक्षाकृत धीमी गति से चल रहा है। वैशाली, सीवान, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, पश्चिम चंपारण और अररिया जैसे जिलों में बड़ी संख्या में लाभुकों का सत्यापन अभी भी लंबित है। अधिकारियों का मानना है कि जागरूकता की कमी, सही जानकारी का अभाव और बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार के लिए राज्य से बाहर रहना इसके मुख्य कारण हैं।

इस बीच राज्य सरकार ने संदिग्ध राशन कार्डधारियों की जांच को भी तेज करने का निर्देश दिया है। जानकारी के अनुसार बिहार में 57 लाख से अधिक राशन कार्डधारियों को संदिग्ध सूची में शामिल किया गया है। इनकी पात्रता की जांच की जा रही है और कई मामलों में लाभुकों को नोटिस भी भेजे गए हैं। अधिकारियों के अनुसार नोटिस मिलने के बाद लाभुकों से निर्धारित समय के भीतर स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो उनका नाम राशन कार्ड से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।

बताया जा रहा है कि अब तक लगभग 33 लाख से अधिक लोगों के नाम ऐसी सूची में शामिल किए जा चुके हैं जिनके राशन कार्ड रद्द होने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खाद्यान्न योजना का लाभ केवल पात्र लोगों तक ही पहुंचे और फर्जी या अपात्र लाभुकों को सूची से हटाया जा सके।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी की प्रक्रिया काफी आसान है और इसे देश के किसी भी राज्य में पूरा कराया जा सकता है। ऐसे लाभुक जो रोजगार या अन्य कारणों से बिहार से बाहर रह रहे हैं, वे अपने नजदीकी जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकान पर जाकर ई-केवाईसी करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें बिहार आने की आवश्यकता नहीं है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार कुछ लाभुक लंबे समय से राशन नहीं उठा रहे हैं, जिसके कारण उनका सत्यापन भी लंबित है। ऐसे मामलों में भी जांच की जा रही है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वे जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को ई-केवाईसी कराने के लिए प्रेरित करें। साथ ही पीडीएस डीलरों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे लाभुकों को इसकी जानकारी दें और प्रक्रिया को तेजी से पूरा कराने में सहयोग करें, ताकि 31 मार्च से पहले सभी पात्र लाभुकों का सत्यापन सुनिश्चित किया जा सके।

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