Report: A.K Chaudhary
सुपौल जिले के राघोपुर रेफरल अस्पताल में पिछले साढ़े पांच वर्षों से चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे डॉ. राहुल झा ने राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। उनका चयन राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS) द्वारा संचालित प्रतिष्ठित डीएनबी (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी) पाठ्यक्रम के लिए बेंगलुरु स्थित में रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में हुआ है। इस सफलता से न केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।
डॉ. राहुल झा ने यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर की अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा नीट-पीजी (NEET-PG) में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर प्राप्त की है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS) देश में डीएनबी जैसे उच्च स्तरीय स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों का संचालन करता है। इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त करना देशभर के युवा चिकित्सकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है, क्योंकि इसके लिए कठिन प्रतिस्पर्धा और उच्च मेरिट की आवश्यकता होती है।
कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में करेंगे विशेषज्ञता
डॉ. झा का चयन जिस विषय में हुआ है, वह चिकित्सा विज्ञान की अत्यंत महत्वपूर्ण शाखा रेडिएशन ऑन्कोलॉजी है। इस क्षेत्र में कैंसर रोगियों का उपचार आधुनिक विकिरण तकनीकों और उन्नत चिकित्सा उपकरणों के माध्यम से किया जाता है। वर्तमान समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों की मांग लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद डॉ. झा कैंसर उपचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे और देशभर के मरीजों को लाभान्वित करेंगे।
साढ़े पांच वर्षों तक राघोपुर की सेवा
जानकारी के अनुसार डॉ. राहुल झा लगभग साढ़े पांच वर्षों से राघोपुर रेफरल अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हजारों मरीजों का उपचार किया तथा ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीमित संसाधनों के बीच भी उन्होंने मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का लगातार प्रयास किया।
अस्पताल में कार्यरत सहकर्मियों के अनुसार डॉ. झा अपनी जिम्मेदारियों के प्रति हमेशा गंभीर और समर्पित रहे हैं। वे मरीजों के इलाज के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता और रोगों की रोकथाम से संबंधित गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
मरीजों के बीच थी अलग पहचान
स्थानीय लोगों और मरीजों के बीच डॉ. राहुल झा की पहचान एक संवेदनशील, सहज और समर्पित चिकित्सक के रूप में रही है। मरीजों का कहना है कि वे केवल अस्पताल की ड्यूटी तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि जरूरत पड़ने पर फोन के माध्यम से भी चिकित्सा परामर्श देते थे।
कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों का मार्गदर्शन किया। जटिल स्वास्थ्य समस्याओं को सरल भाषा में समझाने की उनकी शैली लोगों को काफी पसंद आती थी। यही वजह है कि क्षेत्र के लोग उन्हें केवल डॉक्टर नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्य और संकटमोचक के रूप में देखते हैं।
युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
डॉ. झा की इस सफलता पर अस्पताल कर्मियों, सहकर्मी चिकित्सकों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि उनकी उपलब्धि क्षेत्र के युवा चिकित्सकों तथा मेडिकल छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
स्वास्थ्य कर्मियों का मानना है कि सरकारी अस्पताल में सेवा देते हुए उच्च चिकित्सा शिक्षा के लिए तैयारी करना और राष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त करना आसान नहीं होता। डॉ. झा ने अपने परिश्रम, लगन और अनुशासन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है।
भावुक हुए डॉ. राहुल झा
अपनी सफलता पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ. राहुल झा ने कहा कि राघोपुर के लोगों और अस्पताल परिवार ने मुझे इतना स्नेह और सम्मान दिया कि मुझे कभी परायापन महसूस नहीं हुआ। यहां का सहयोग, विश्वास और प्यार हमेशा मेरी यादों में रहेगा। मैं यहां के लोगों का सदैव आभारी रहूंगा। उन्होंने कहा कि आगे की पढ़ाई और प्रशिक्षण के दौरान भी वे राघोपुर की यादों को अपने साथ लेकर चलेंगे तथा भविष्य में कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने का प्रयास करेंगे।
क्षेत्र में खुशी का माहौल
डॉ. राहुल झा के चयन की खबर फैलते ही पूरे राघोपुर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। अस्पताल कर्मियों, शुभचिंतकों और स्थानीय लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। लोगों ने विश्वास जताया है कि वे अपनी प्रतिभा और समर्पण के बल पर कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएंगे तथा समाज और देश की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।







