सुपौल: ड्यूटी आवर में क्लास छोड़ बाजार में चाय की चुस्की लेते व सिगरेट पीते मिले शिक्षक, हरावत राज उच्च माध्यमिक विद्यालय की कार्यशैली पर उठे सवाल

Report: A.K. Chaudhary

सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत गणपतगंज स्थित हरावत राज उच्च माध्यमिक विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था इन दिनों सवालों के घेरे में है। विद्यालय में शिक्षकों की कार्यशैली को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि विद्यालय के कुछ शिक्षक निर्धारित ड्यूटी अवधि में कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाने के बजाय बाजार में घूमते और चाय दुकानों पर समय बिताते नजर आते हैं। इससे विद्यालय में पढ़ाई की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इसी क्रम में शुक्रवार को सुबह करीब 11:35 बजे गणपतगंज बाजार स्थित एक चाय दुकान पर हरावत राज उच्च माध्यमिक विद्यालय के तीन शिक्षक मौजूद मिले। इनमें विज्ञान, अंग्रेजी तथा उर्दू विषय के शिक्षक शामिल थे। स्थानीय स्तर पर सामने आए इस मामले ने विद्यालय की नियमित शैक्षणिक गतिविधियों और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

चाय दुकान पर सिगरेट पीते शिक्षक

मौके पर मौजूद शिक्षकों से जब विद्यालय अवधि में बाजार में रहने को लेकर सवाल किया गया तो विज्ञान विषय के शिक्षक ने बताया कि उन्होंने विज्ञान के बच्चों को कक्षा में प्रोजेक्ट दे दिया है। इसके बाद वे बाजार आए हैं। हालांकि, इस दौरान यह सवाल भी उठता है कि जब शिक्षक कक्षा में मौजूद नहीं हैं और बच्चों को प्रोजेक्ट देकर बाहर चले जाते हैं तो विद्यार्थियों के कार्यों की निगरानी कौन करता है? प्रोजेक्ट के दौरान बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी होने या मार्गदर्शन की आवश्यकता पड़ने पर उनकी मदद कौन करेगा?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विद्यालय के कई शिक्षक नियमित रूप से पढ़ाई के समय कक्षाओं से बाहर निकलकर बाजार की चाय दुकानों पर पहुंच जाते हैं। वहां चाय पीने के साथ सिगरेट और गुटखा का सेवन करते हुए काफी समय बिताते हैं। लोगों का कहना है कि यह स्थिति किसी एक दिन तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित तौर पर आए दिन ऐसी गतिविधियां देखने को मिलती हैं।

स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विद्यालय में बच्चे बेहतर शिक्षा की उम्मीद लेकर आते हैं। अभिभावक अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए उन्हें स्कूल भेजते हैं, लेकिन यदि पढ़ाई के निर्धारित समय में शिक्षक ही कक्षा से गायब रहेंगे तो बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी? विद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति का उद्देश्य केवल हाजिरी बनाना नहीं, बल्कि निर्धारित समय तक कक्षाओं में रहकर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना भी है।

लोगों ने यह भी बताया कि पूर्व में भी विद्यालय की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ चुके हैं। उस दौरान 20 शिक्षकों में मात्र आठ शिक्षक ही कक्षा में उपस्थित पाए गए थे। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई सामने नहीं आने से स्थानीय लोगों में असंतोष है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की लापरवाही पर रोक नहीं लगाई गई तो विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और प्रभावित हो सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिक्षक ही निर्धारित कक्षा अवधि में विद्यालय से बाहर रहेंगे तो विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या विद्यालय प्रबंधन को शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और कक्षा संचालन की जानकारी नहीं रहती है या फिर इस ओर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? साथ ही, पूर्व में सामने आई अनियमितताओं के बाद भी कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाध्यापक महानंद पांडेय से जब बयान लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार किया। वही इस मामले में राघोपुर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुनील कुमार देव ने बताया कि मामले की जांच कर आगे की कार्यवाई की जाएगी।

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