सुपौल: गणपतगंज में विशाल निरंकारी संत समागम आयोजित, केंद्रीय प्रचारक निर्मल कुमार सोनी ने दिया मानवता और ब्रह्मज्ञान का संदेश

सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड के गणपतगंज में आयोजित विशाल निरंकारी संत समागम में केंद्रीय प्रचारक संत निर्मल कुमार सोनी ने मानवता, प्रेम और ब्रह्मज्ञान का संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और निरंकारी मिशन के पदाधिकारी व सेवादार उपस्थित रहे।

Report: A.K Chaudhary

सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज ब्रांच अंतर्गत राघोपुर प्रखंड के गणपतगंज स्थित पंचायत भवन परिसर में शुक्रवार को एक दिवसीय विशाल निरंकारी संत समागम का भव्य आयोजन किया गया। समागम में सुपौल सहित आसपास के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में निरंकारी मिशन के श्रद्धालु एवं महात्मा शामिल हुए। कार्यक्रम को लेकर सुबह से ही मिशन के सेवादार एवं श्रद्धालु युद्धस्तर पर व्यवस्थाओं में जुटे रहे। पूरे परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और श्रद्धालुओं के बैठने सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं।

समागम का आयोजन दोपहर 12 बजे से 2:30 बजे तक पंचायत भवन परिसर में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय प्रचारक परम आदरणीय संत निर्मल कुमार सोनी ने की। इस अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की असीम कृपा से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश प्रदान किया गया। सत्संग के दौरान भजन-कीर्तन एवं प्रवचनों के माध्यम से मानव जीवन के उद्देश्य, ईश्वर प्राप्ति तथा प्रेम, भाईचारा और मानवता का संदेश दिया गया।

सत्संग को संबोधित करते हुए केंद्रीय प्रचारक संत निर्मल कुमार सोनी ने कहा कि सुपौल की यह धरती अत्यंत पावन और प्रेम से परिपूर्ण है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का सत्संग में पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि लोगों में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि युगों-युगों से धर्म का मूल उद्देश्य मानवता को जोड़ना रहा है, धर्म कभी भी तोड़ने का कार्य नहीं करता। यदि धर्म को सही रूप में समझा जाए तो समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की स्थापना स्वतः हो जाती है। उन्होंने कहा कि धर्म की वास्तविक स्थापना तभी संभव है जब मनुष्य को प्रभु की सच्ची पहचान अर्थात ब्रह्मज्ञान प्राप्त हो। ब्रह्मज्ञान के बिना ईश्वर की अनुभूति संभव नहीं है और इस ज्ञान की प्राप्ति का एकमात्र माध्यम सद्गुरु होते हैं। सद्गुरु ही मनुष्य को निराकार परमात्मा का साक्षात्कार कराकर जीवन का वास्तविक उद्देश्य बताते हैं।

उन्होंने बताया कि सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज अपनी कल्याण यात्राओं के माध्यम से देश-विदेश में मानवता, प्रेम और विश्व बंधुत्व का संदेश पहुंचा रही हैं। उसी क्रम में उनके संदेशवाहक विभिन्न स्थानों पर सत्संग आयोजित कर जनकल्याण का संदेश लोगों तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की धरती पर 12 जुलाई से लगातार विभिन्न जिलों में सत्संग आयोजित किए जा रहे हैं और इन सभी कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल एक है—मानवता की स्थापना। इसका आधार ब्रह्मज्ञान है और ब्रह्मज्ञान का मार्ग केवल सद्गुरु के माध्यम से ही प्राप्त होता है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रेम का वास्तविक स्रोत निराकार ईश्वर है। जब मनुष्य निराकार प्रभु से जुड़ता है तभी उसके जीवन में प्रेम, करुणा, सेवा और समानता का भाव विकसित होता है। निरंकारी मिशन का संदेश है कि प्रत्येक मानव का जन्मसिद्ध अधिकार है कि वह अपने वास्तविक स्वरूप को पहचाने। आत्मबोध और ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही मानव अपने जीवन को सार्थक बनाते हुए समाज और राष्ट्र के कल्याण में योगदान दे सकता है।

समागम में अतिथि के रूप में दरभंगा के मुखी नंदकिशोर राय, सहरसा सेवादल संचालक ललन चौधरी, सुपौल मुखी नारायण साहू, हिरपट्टी मुखी लक्ष्मीनारायण साह तथा रामचन्द्र साह सहित कई वरिष्ठ महात्मा उपस्थित रहे। सभी ने सतगुरु के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में स्वागतकर्ता सह मुखी महात्मा भूपेंद्र यादव, सत्संग इंचार्ज वासुदेव यादव, सेवादल इंचार्ज अरविंद कुमार, महिला सेवादल इंचार्ज सरिता देवी, सहयोग सेवादल सिकेन्द्र यादव, जयप्रकाश चौधरी, प्रमोद चौधरी, सुखदेव शर्मा, शिवसागर सिंह, ब्रांच मीडिया प्रभारी अरुण कुमार चौधरी, मुखिया कमलेश साह, गुड्डू चौधरी, शिवनारायण मेहता, अर्जुन यादव, बालकृष्ण यादव, प्रदीप पांडे, नरेश मेहता, सुधीर कुमार, बाबुनन्द, अमित, योगानंद मेहता सहित बड़ी संख्या में सेवादारों एवं श्रद्धालुओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।

Leave a Comment

[democracy id="1"]