Report: A.K Chaudhary
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को समृद्धि यात्रा के तीसरे चरण के तहत सुपौल जिले के निर्मली प्रखंड पहुंचे। यहां उन्होंने करीब 435 करोड़ रुपये की लागत से 84 योजनाओं का शिलान्यास तथा लगभग 135 करोड़ रुपये की लागत से 129 योजनाओं का उद्घाटन किया। इस प्रकार जिले को कुल मिलाकर लगभग 570 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात मिली।

निर्मली पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर निर्धारित स्थल पर उतरा, जिसके बाद वे सड़क मार्ग से निर्मली रिंग बांध का जायजा लेने पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री अनुमंडल कार्यालय परिसर में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों की ओर से लगाए गए सरकारी योजनाओं के स्टॉलों का भी उन्होंने अवलोकन किया और संबंधित अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी प्राप्त की।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य बिहार के प्रत्येक क्षेत्र में विकास की गति को तेज करना है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से अब तक 2 लाख 58 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है, जिससे राज्य में शिक्षकों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 5 लाख 24 हजार हो गई है। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के सहयोग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिहार के विकास में निरंतर सहयोग मिल रहा है और केंद्र की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्य को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। युवाओं के रोजगार के विषय में उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सृजन की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी वर्गों के कल्याण के लिए योजनाएं लागू की हैं। अल्पसंख्यक समुदाय के लिए भी कई पहल की गई हैं। मदरसों को सरकारी मान्यता दी गई है तथा वहां के शिक्षकों के लिए वेतन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023 में कराई गई जाति आधारित जनगणना का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्वेक्षण के दौरान करीब 94 लाख परिवार आर्थिक रूप से कमजोर पाए गए। इसी आधार पर गरीब परिवारों के उत्थान के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंच सके।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्व की सरकारों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब शाम होते ही लोग घरों से निकलने में डरते थे और कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर थी। उन्होंने कहा कि अब राज्य में सामाजिक सौहार्द और शांति का वातावरण कायम हुआ है। सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ हर वर्ग और हर समुदाय तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्ष 2018 में ही राज्य के सभी घरों तक बिजली पहुंचा दी गई थी और अब लोगों को मुफ्त बिजली की सुविधा दी जा रही है। इसके साथ ही घरों में सोलर ऊर्जा की व्यवस्था करने की दिशा में भी काम चल रहा है, जिससे लोगों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान एक रोचक दृश्य भी देखने को मिला जब मुख्यमंत्री ने मंच पर ही ऊर्जा सह वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव को टोपी और फूलों का गुलदस्ता देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सुपौल जिले के लिए आठ नई योजनाओं की स्वीकृति भी दी गई है, जिन पर कार्य प्रारंभ हो चुका है और इससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभा में आश्वस्त किया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में विकास कार्य निरंतर जारी रहेंगे। वहीं विजय चौधरी ने कहा कि राज्यसभा जाने का फैसला मुख्यमंत्री ने बिहार और बिहारवासियों की सेवा के लिए लिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नीतीश कुमार बिहार और उसके लोगों से कभी अलग नहीं रहेंगे और उनकी प्रतिबद्धता अटूट है।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, ऊर्जा सह वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी, विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, राम विलास कामत, सोनम रानी सहित एनडीए के कई नेता तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। जनसभा में हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिसमें महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।







