Report: A.K Chaudhary
सुपौल जिले के सिमराही स्थित बूथ संख्या 300 पर सोमवार को भाजपा महिला मोर्चा द्वारा जिलास्तरीय प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश महिला मोर्चा उपाध्यक्ष गुंजा बेंगानी ने नारी शक्ति वंदन अभियान और नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास का ऐतिहासिक कदम बताया।
उन्होंने कहा कि सितंबर 2023 में पारित यह संवैधानिक संशोधन लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित करता है। यह केवल महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि भारत को अधिक समावेशी, संवेदनशील और सशक्त लोकतंत्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि वैश्विक शोध भी यह दर्शाते हैं कि जब महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, तो अर्थव्यवस्था तेज़ी से विकसित होती है, आय में समानता आती है और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है। यदि लैंगिक अंतर कम किया जाए तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़े स्तर पर वृद्धि संभव है। जिन संस्थानों और कंपनियों में महिलाओं की भागीदारी अधिक होती है, उनका प्रदर्शन भी बेहतर होता है।
पिछले एक दशक में भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लगभग 72 प्रतिशत घर महिलाओं के नाम हुए हैं। STEM क्षेत्र में 43 प्रतिशत महिलाएं स्नातक हैं। मुद्रा योजना के 69 प्रतिशत ऋण और स्टैंड-अप इंडिया योजना के 84 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं।
महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार के लिए केंद्र सरकार की कई योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया गया कि उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन दिए गए, जल जीवन मिशन के तहत 14.45 करोड़ घरों तक पानी पहुंचाया गया और स्वच्छ भारत मिशन के जरिए खुले में शौच से मुक्ति मिली। इसके साथ ही महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र, मातृत्व अवकाश को 26 सप्ताह तक बढ़ाना और मातृ मृत्यु दर में कमी जैसे कदम भी महत्वपूर्ण रहे हैं।

राजनीतिक भागीदारी पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि आज महिलाएं बड़ी संख्या में मतदान कर रही हैं। 2024 तक देश में लगभग 48.62 प्रतिशत मतदाता महिलाएं हैं और कई चुनावों में उनका मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा है। इसके बावजूद संसद और विधानसभाओं में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी सीमित है। लोकसभा में 1952 में 22 महिलाओं की तुलना में 2024 में यह संख्या बढ़कर 75 हुई है, जबकि राज्यसभा में महिलाओं की भागीदारी लगभग 17 प्रतिशत है।
पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की सफलता का उदाहरण देते हुए बताया गया कि वर्तमान में लगभग 14.5 लाख महिलाएं निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जो कुल का करीब 46 प्रतिशत है। गांवों में महिला नेतृत्व के कारण पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और पोषण जैसे मुद्दों पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं।
गुंजा बेंगानी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को केवल “नीति की लाभार्थी” नहीं, बल्कि “नीति की निर्माता” बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। जब संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, तो नीतियां अधिक जन-केंद्रित और प्रभावी बनेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जन धन योजना और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से सशक्त किया गया है। आज 32 करोड़ से अधिक महिलाएं बैंकिंग प्रणाली से जुड़ी हैं और 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि भारत ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ा ली है, अब अगला कदम उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी दिशा में एक निर्णायक पहल है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रेस वार्ता में महिला नेतृत्व वाले विकास मॉडल को देश के भविष्य की आधारशिला बताते हुए महिलाओं से अधिक से अधिक संख्या में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का आह्वान किया गया।
मौके पर जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष विनीता देवी, जिला उपाध्यक्ष सीमा कुशवाहा, जिला मंत्री स्मृति कुमारी, महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष राघोपुर दक्षिण मधुबाला कुमारी, रूबी कुमारी आदि उपस्थित थे।







