सुपौल डीएम सख्त: री-एडमिशन शुल्क वसूली पर कार्रवाई के निर्देश, निजी स्कूलों को पारदर्शिता अपनाने का आदेश

सुपौल में डीएम की बैठक में निजी स्कूलों को सख्त निर्देश दिए गए। री-एडमिशन के नाम पर शुल्क वसूली पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई, साथ ही फीस पारदर्शिता और नियमों के पालन पर जोर दिया गया।

Report: A.K Chaudhary

सुपौल जिले स्थित समाहरणालय में जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में निजी विद्यालयों के संचालक एवं प्राचार्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त सारा अशरफ सहित शिक्षा विभाग के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

बैठक का मुख्य उद्देश्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009, निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2019 तथा बिहार राज्य बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली 2011 के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करना रहा।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सभी निजी विद्यालयों को निर्देश दिया कि वे अपने विद्यालय की वेबसाइट और सूचना पट्ट पर वर्गवार शुल्क की पूरी जानकारी सार्वजनिक करें, ताकि अभिभावकों को पारदर्शी जानकारी मिल सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “री-एडमिशन” के नाम पर छात्रों से अतिरिक्त शुल्क लेना अनुचित है और इस तरह की शिकायत मिलने पर संबंधित विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

समीक्षा के क्रम में यह सामने आया कि जिले के 34 निजी विद्यालयों ने कक्षा-1 में संभावित नामांकन क्षमता (इंटेक कैपेसिटी) को ज्ञानदीप पोर्टल पर अपडेट नहीं किया है। इस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विद्यालयों को दो दिनों के भीतर जानकारी अपडेट करने का निर्देश दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा के अंदर जानकारी अपलोड नहीं करने वाले विद्यालयों पर सूचना छुपाने और विभागीय निर्देशों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए उनके संचालन पर रोक सहित अन्य कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि कुछ निजी विद्यालय किताबों की खरीद में मनमानी राशि वसूल रहे हैं। इस पर कई संचालकों ने भी इसे गलत माना। उप विकास आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि शुल्क वृद्धि के लिए निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2019 का पालन अनिवार्य है, अन्यथा अधिनियम की धारा 7 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि वे अपने दैनिक निरीक्षण में निजी विद्यालयों का नियमित रूप से निरीक्षण करें और छात्रों एवं अभिभावकों से संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें।

बैठक में सभी निजी विद्यालयों को दो सप्ताह के भीतर अपार कार्ड (APAR ID) बनाने का निर्देश दिया गया। साथ ही उप विकास आयुक्त ने सभी विद्यालय संचालकों से जनगणना कार्य में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और ऑनलाइन पोर्टल पर अपने एवं अपने परिवार की जानकारी अपडेट करने को कहा। उन्होंने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर संचालक अपने नजदीकी सरकारी विद्यालय के प्रशिक्षित शिक्षकों से संपर्क कर सकते हैं।

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