NEET-UG 2026 रद्द: पेपर लीक के शक पर NTA का बड़ा फैसला, CBI करेगी जांच

पेपर लीक के शक और जांच एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद NTA ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी है। करीब 22 लाख छात्रों को अब दोबारा परीक्षा देनी होगी, जबकि पूरे मामले की जांच CBI को सौंपी गई है।

News Desk:

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है। National Testing Agency (NTA) ने 3 मई 2026 को आयोजित हुई परीक्षा को रद्द करने की घोषणा कर दी है। एजेंसी ने यह कदम परीक्षा में संभावित पेपर लीक और परीक्षा की गोपनीयता पर उठे गंभीर सवालों के बाद उठाया है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद जारी आधिकारिक सूचना में कहा गया है कि परीक्षा अब दोबारा आयोजित की जाएगी, जबकि नई तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी। पूरे मामले की जांच अब Central Bureau of Investigation (CBI) करेगी।

देशभर में आयोजित इस परीक्षा में करीब 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। मेडिकल, डेंटल और आयुष पाठ्यक्रमों—जैसे एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस और बीएचएमएस—में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली यह परीक्षा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने की खबर ने छात्रों और अभिभावकों के बीच हलचल बढ़ा दी है।

सूत्रों के अनुसार परीक्षा संपन्न होने के कुछ दिनों बाद एनटीए को पेपर लीक और प्रश्नपत्र से जुड़ी कुछ संदिग्ध जानकारियां प्राप्त हुई थीं। प्रारंभिक स्तर पर इन सूचनाओं का सत्यापन किया गया, जिसके बाद मामला केंद्रीय जांच एजेंसियों तक पहुंचाया गया। जांच में मिले शुरुआती तथ्यों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर यह माना गया कि परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके बाद परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया।

मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में कई अहम जानकारियां सामने आईं। जांच एजेंसी को पता चला कि परीक्षा से कई दिन पहले एक तथाकथित “गेस पेपर” कुछ अभ्यर्थियों और कंसल्टेंसी नेटवर्क के बीच प्रसारित हो रहा था। दावा किया जा रहा है कि इस सामग्री में शामिल कई सवाल वास्तविक परीक्षा से मेल खाते पाए गए। इसी आधार पर पेपर लीक की आशंका और गहरी हो गई।

जांच एजेंसियों ने राजस्थान, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में कार्रवाई करते हुए अनेक संदिग्धों को हिरासत में लिया है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि कुछ करियर काउंसलर, कंसल्टेंसी संचालक और बिचौलिये इस पूरे नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र या उससे जुड़ी सामग्री छात्रों तक कैसे पहुंची और इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।

एनटीए ने अपने बयान में कहा है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। एजेंसी ने माना कि परीक्षा दोबारा आयोजित करने से लाखों छात्रों और उनके परिवारों को असुविधा होगी, लेकिन परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा कायम रखने के लिए यह निर्णय जरूरी था।

एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों ने मई 2026 सत्र के लिए आवेदन किया था, उनका पंजीकरण दोबारा मान्य रहेगा। अभ्यर्थियों को फिर से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी और उनसे कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। नई परीक्षा तिथि, एडमिट कार्ड और अन्य जरूरी जानकारी एनटीए अपने आधिकारिक माध्यमों से जल्द जारी करेगा।

फिलहाल देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की नजर अब एनटीए की अगली घोषणा और सीबीआई जांच की प्रगति पर टिकी हुई है। यह मामला केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली में छात्रों के भरोसे से भी जुड़ा माना जा रहा है।

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