15 साल में खंडहर बना प्राथमिक विद्यालय: छत टपक रही, दीवारों में दरार; शौचालय-पेयजल नहीं, तीन कमरों में चल रही पढ़ाई

सुपौल के राघोपुर स्थित तारा देवी फुदाय यादव प्राथमिक विद्यालय का भवन महज 15 साल में जर्जर हो गया है। स्कूल में शौचालय, पेयजल और घेराबंदी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। पांच में से केवल तीन कमरों में बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है, जबकि बारिश में छत टपकने और दीवारों में दरार के कारण हादसे की आशंका बनी हुई है।

Report: A.K Chaudhary

सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड क्षेत्र के राम विशनपुर पंचायत अंतर्गत दही पौड़ी वार्ड संख्या-2 स्थित तारा देवी फुदाय यादव प्राथमिक विद्यालय की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदहाल होती जा रही है। वर्ष 2010 में निर्मित यह विद्यालय भवन महज 15 वर्षों के भीतर ही जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। हालत ऐसी है कि विद्यालय भवन कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। बावजूद इसके छोटे-छोटे बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर यहां पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

जर्जर भवन

विद्यालय में कुल 64 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। स्कूल भवन में पांच कमरे बने हुए हैं, लेकिन भवन की खराब स्थिति के कारण केवल तीन कमरों में ही पठन-पाठन कराया जा रहा है। शेष कमरे उपयोग के लायक नहीं बचे हैं। बारिश होने पर छत से पानी टपकने लगता है, जबकि कई जगहों पर दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें उभर आई हैं। बरसात के मौसम में बच्चों को बैठाकर पढ़ाना शिक्षकों के लिए भी चुनौती बन जाता है।

जर्जर भवन

विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का भी गंभीर अभाव है। यहां न तो शौचालय की समुचित व्यवस्था है और न ही पेयजल की सुविधा उपलब्ध है। विद्यालय परिसर में घेराबंदी नहीं होने से सुरक्षा व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। शौचालय नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी भारी परेशानी उठानी पड़ती है। मजबूरी में आसपास के घरों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे बच्चों और शिक्षकों दोनों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।

विद्यालय की शिक्षिका सुनीता कुमारी और आशा कुमारी ने बताया कि शौचालय व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में विद्यालय संचालन काफी कठिन हो गया है। खासकर छात्राओं को सबसे अधिक परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि कई बार विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक मनोज कुमार सुमन ने बताया कि विद्यालय भवन काफी जर्जर हो चुका है। बारिश के दिनों में छत टपकने से पढ़ाई बाधित होती है। बच्चों को जर्जर कमरों में बैठाना भी जोखिम भरा हो गया है। उन्होंने कहा कि शौचालय, पेयजल और घेराबंदी की मांग को लेकर विभाग को कई बार पत्र भेजा गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

स्थानीय निवासी नरेंद्र यादव ने बताया कि विद्यालय की खराब स्थिति को लेकर स्थानीय विधायक अनिरुद्ध यादव को भी लिखित आवेदन दिया गया था। इसके बावजूद शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई पहल नहीं की गई। उन्होंने कहा कि गांव के गरीब परिवारों के बच्चे इसी विद्यालय में पढ़ते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।

इधर, राघोपुर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुनील कुमार देव ने कहा कि मामले की जानकारी मिली है। विद्यालय का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से केवल आश्वासन ही मिल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हो रहा।

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार विभाग कब गंभीर होगा। जर्जर भवन, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान कब तक होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।

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