सुपौल: मिड-डे मील खाने के बाद 94 छात्र-छात्राओं की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती, जांच शुरू

सुपौल के त्रिवेणीगंज स्थित मध्य विद्यालय मिरजवा में मिड-डे मील खाने के बाद 94 छात्र-छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई। सभी बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों ने सभी को खतरे से बाहर बताया है, जबकि प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

Report: Amresh Kumar

सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय मिरजवा में बुधवार को मिड-डे मील खाने के बाद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की तबीयत अचानक खराब हो गई। भोजन करने के कुछ देर बाद कई बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, चक्कर, गले में जलन और बेचैनी की शिकायत की। देखते ही देखते कई अन्य बच्चों की भी तबीयत बिगड़ने लगी, जिससे विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

गंभीर स्थिति को देखते हुए स्कूल प्रशासन और शिक्षकों ने तत्काल बीमार बच्चों को अनुमंडलीय अस्पताल त्रिवेणीगंज पहुंचाया। अस्पताल में एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों और उनके परिजनों के पहुंचने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि चिकित्सकों की टीम ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया।

जानकारी के अनुसार, विद्यालय में मिड-डे मील के तहत बच्चों को चावल और आलू-चना की सब्जी परोसी गई थी। कुछ छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि परोसी गई सब्जी में मरा हुआ गिरगिट मिला था, जबकि कुछ बच्चों ने बिच्छू होने की भी बात कही है। हालांकि इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

घटना की सूचना मिलते ही मिड-डे मील प्रभारी पंकज कुमार सिंह अस्पताल पहुंचे और बच्चों की स्थिति की जानकारी ली। वहीं प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की निगरानी में जुट गए।

अनुमंडलीय अस्पताल के चिकित्सक डॉ. बी.एन. पासवान ने बताया कि कुल 94 छात्र-छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया। सभी बच्चों का इलाज किया गया है और उनकी हालत अब स्थिर है। चिकित्सकों के अनुसार सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं तथा लगातार उनकी निगरानी की जा रही है।

घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम अभिषेक कुमार, एसडीपीओ विभाष कुमार, थानाध्यक्ष राकेश कुमार और बीडीओ परमानंद प्रसाद सहित अन्य अधिकारी अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने बीमार बच्चों का हालचाल जाना और भोजन की गुणवत्ता सहित पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बच्चों के बीमार होने के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

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