News Desk Patna:
बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने दावा किया कि राज्यभर में मतदाता सूची से 65 लाख से अधिक नाम हटाए गए और इस मुद्दे पर पार्टी की ओर से चुनाव आयोग को 89 लाख शिकायतें सौंपी गई हैं। लेकिन निर्वाचन आयोग और राज्य के कई जिलों के जिलाधिकारियों (DM) ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग का कहना है कि कांग्रेस ने अब तक एक भी आधिकारिक फॉर्म या शपथ पत्र जमा नहीं किया है।
कांग्रेस का बड़ा आरोप
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा और नेता राजेश राम ने दावा किया कि:
- बिहार में बूथ स्तर पर मतदाता सूची से नाम हटाने का बड़ा खेल हुआ है।
- 20,000 से अधिक बूथों पर 100 से ज्यादा नाम काटे गए।
- कई बूथों पर महिलाओं के नाम तक 70% तक हटाए गए।
- यह सब महज तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि “सुनियोजित पैटर्न” है।
- पार्टी के पास शिकायतों की रसीदें मौजूद हैं और इन्हें आयोग को सौंपा गया है।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) के जरिए आवेदन एकत्र किए गए और फिर जिला निर्वाचन पदाधिकारियों (DEO) को सौंपे गए। कांग्रेस के अनुसार, यह पूरा मामला विपक्षी मतदाताओं को चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने की साजिश है।

चुनाव आयोग और जिलों का पलटवार
कांग्रेस के दावे पर निर्वाचन आयोग ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि—
- “राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी की ओर से कोई शपथ पत्र, आधिकारिक दस्तावेज, डेटा या ठोस प्रमाण आयोग को नहीं सौंपा गया है।”
- आरोप लगाना और सबूत पेश करना दो अलग बातें हैं। अब तक केवल बयानबाजी हुई है, प्रक्रिया का पालन नहीं।
इसी बीच, बिहार के कई जिलों के जिलाधिकारियों ने भी कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया।

- मुजफ्फरपुर के DM ने कांग्रेस के सोशल मीडिया पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा कि आज तक, बिहार में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किसी भी जिला अध्यक्ष द्वारा अधिकृत किसी भी बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) ने 1 अगस्त 2025 को निर्धारित प्रारूप में प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में किसी भी नाम पर कोई दावा (फॉर्म 6) या आपत्ति (फॉर्म 7) प्रस्तुत नहीं की है।
- सुपौल के DM ने भी स्पष्ट किया कि अब तक कांग्रेस पार्टी के किसी भी जिला अध्यक्ष या अधिकृत बूथ स्तर अभिकर्ता (BLA) ने कोई दावा या आपत्ति नहीं दी है।
- दरभंगा, पूर्णिया, सारण, किशनगंज, अररिया, पश्चिमी चंपारण, सहरसा, अरवल, समस्तीपुर, रोहतास, नालंदा, सिवान, नवादा, बांका, मुजफ्फरपुर और गया सहित कई जिलों ने भी यही बयान जारी किया।

इससे साफ हो गया कि कांग्रेस के दावे और जिलों के रिकॉर्ड में भारी विरोधाभास है।
राहुल गांधी की भूमिका
कांग्रेस के इस अभियान की अगुवाई राहुल गांधी कर रहे थे। उन्होंने अपने सार्वजनिक संबोधनों में कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर विपक्षी मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं और यह लोकतंत्र की हत्या है। लेकिन जब आयोग ने उनसे शपथ पत्र और सबूत मांगे, तो उनकी ओर से कोई भी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
आयोग ने साफ शब्दों में कहा कि राहुल गांधी ने न तो कोई शपथ पत्र जमा किया और न ही कोई आधिकारिक दस्तावेज। इस वजह से कांग्रेस के आरोप अब तक सिर्फ राजनीतिक भाषणों तक सीमित रह गए हैं।
पटना के गांधी मैदान का विवाद
राहुल गांधी की रैली के दौरान एक और विवाद उठा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उन्हें पटना के गांधी मैदान में रातभर रुकने की अनुमति नहीं दी गई। लेकिन पटना जिला प्रशासन ने इसका खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि:
- कांग्रेस ने केवल सभा और रैली की अनुमति मांगी थी, जो दे दी गई।
- रातभर ठहरने के लिए किसी तरह का आवेदन ही नहीं दिया गया।
इससे कांग्रेस का यह आरोप भी बेबुनियाद साबित हुआ।
सबसे बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस का “89 लाख शिकायतों” का आंकड़ा आखिर आया कहां से?
- अगर शिकायतें वाकई दर्ज कराई गईं थीं, तो उनका रिकॉर्ड किसके पास है?
- क्यों न तो निर्वाचन आयोग और न ही किसी जिले के डीएम के पास इसकी कोई जानकारी है?
- और अगर शिकायतें दी ही नहीं गईं, तो क्या यह केवल राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश थी?







