सुपौल पुलिस की बड़ी कार्रवाई: फर्जी आधार-दस्तावेज गिरोह का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड समेत तीन गिरफ्तार, भारी उपकरण जब्त

सुपौल पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी दस्तावेज और आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और भारी मात्रा में उपकरण व फर्जी कागजात जब्त किए गए हैं।

Report: A.K Chaudhary

बिहार के सुपौल जिले में पुलिस ने एक बड़े साइबर और दस्तावेज़ जालसाजी गिरोह का पर्दाफाश कर सनसनी फैला दी है। यह कार्रवाई जिले में बढ़ते फर्जीवाड़े और अवैध पहचान पत्र निर्माण की शिकायतों के बीच की गई, जिसे पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष अभियान के तहत अंजाम दिया गया।

छापेमारी में दो आरोपी मौके से गिरफ्तार

9 अप्रैल 2026 को बसबिट्टी चौक स्थित एक संदिग्ध आधार सेंटर पर गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की गई। पुलिस टीम के पहुंचते ही मौके पर हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद दो व्यक्तियों—बाबूल कुमार गुप्ता (23 वर्ष) और मुकेश पासवान (30 वर्ष)—को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में दोनों ने खुद को आधार से संबंधित कार्य करने वाला बताया, लेकिन जब उनसे आधार लाइसेंसिंग और वैध रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज मांगे गए, तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इससे पुलिस का संदेह और गहरा गया।

फर्जी वेबसाइट के जरिए बनते थे दस्तावेज

जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ कि यह गिरोह एक विशेष वेबसाइट के माध्यम से फर्जी आवासीय प्रमाण पत्र तैयार करता था। इसके बाद ECM आधार सॉफ्टवेयर को बायपास कर अवैध तरीके से आधार कार्ड बनाए जाते थे। यह पूरा काम सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था, जिसमें तकनीकी उपकरणों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल हो रहा था।

भारी मात्रा में उपकरण और दस्तावेज जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से कई अहम उपकरण बरामद किए, जिनमें शामिल हैं: लैपटॉप प्रिंटर और स्कैनर आईरिस स्कैनर और फिंगरप्रिंट स्कैनर मोबाइल फोन और कैमरा GPS डिवाइस और कई सिम कार्ड नकदी राशि इसके अलावा हजारों की संख्या में फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए गए, जो इस गिरोह के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।

नेटवर्क का मास्टरमाइंड भी गिरफ्तार

जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने इस गिरोह के मुख्य संचालक पप्पू कुमार की पहचान की। इसके बाद उसे सारण जिले के मकेर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह सिर्फ सुपौल तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए विभिन्न राज्यों में करीब 1250 से अधिक यूजर अकाउंट संचालित किए जा रहे थे। इससे इस नेटवर्क के व्यापक और संगठित होने का अंदाजा लगाया जा सकता है।

केस दर्ज, आगे की जांच जारी

इस मामले में साइबर थाना, सुपौल में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। गिरफ्तार तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के फर्जीवाड़े और साइबर अपराध के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी आधार या दस्तावेज संबंधित कार्य के लिए केवल अधिकृत केंद्रों का ही उपयोग करें, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।

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