शराबबंदी के बीच सुपौल में नशीले इंजेक्शन का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, 2,115 वायल के साथ तस्कर गिरफ्तार

सुपौल सदर थाना पुलिस ने गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए विद्यापुरी से 2,115 वायल (4,230 एमएल) नशीले इंजेक्शन बरामद किए हैं। मामले में एनडीपीएस के फरार आरोपी संतोष मुखिया को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

News Desk Supaul:

बिहार में शराबबंदी लागू होने के लगभग एक दशक बाद नशे के कारोबार का स्वरूप बदलता नजर आ रहा है। जहां एक ओर शराब की तस्करी पर लगातार कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर नशीले इंजेक्शनों और प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार के बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी कड़ी में सुपौल पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए भारी मात्रा में नशीले इंजेक्शन बरामद किए हैं। इस कार्रवाई ने जिले में अवैध नशे के नेटवर्क को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुपौल सदर थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर शहर के विद्यापुरी वार्ड संख्या-2 में देर रात छापेमारी की। इस दौरान एक मकान से 2,115 वायल (कुल 4,230 एमएल) नशीले इंजेक्शन बरामद किए गए। मौके से पुलिस ने संतोष मुखिया को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मूल रूप से बेला गोठ, थाना किशनपुर का निवासी है और वर्तमान में विद्यापुरी में किराये के मकान में रह रहा था।

जानकारी देते हुए डीएसपी राजीव रंजन ने बताया कि सदर थाना अध्यक्ष रामसेवक रावत को सूचना मिली थी कि विद्यापुरी स्थित एक मकान से बड़े पैमाने पर नशीले इंजेक्शनों का अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा है। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में नशीले इंजेक्शन बरामद हुए और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार संतोष मुखिया पहले से ही एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में फरार चल रहा था। पुलिस का मानना है कि आरोपी लंबे समय से नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध बिक्री में संलिप्त था।

फिलहाल पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि नशीले इंजेक्शन कहां से मंगाए जाते थे, इनके सप्लायर कौन हैं, जिले में किन-किन लोगों तक इनकी आपूर्ति की जाती थी और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है और जल्द ही आगे की कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

इस बरामदगी के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या शराबबंदी के बाद बिहार में नशे का कारोबार नए रूप में फैल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रतिबंधित दवाओं और नशीले इंजेक्शनों की अवैध बिक्री पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका सबसे अधिक असर युवाओं पर पड़ सकता है।

सुपौल पुलिस की यह कार्रवाई न केवल जिले में सक्रिय नशा तस्करी के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार मानी जा रही है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि अब कानून-व्यवस्था एजेंसियां नशे के बदलते स्वरूप पर भी पैनी नजर बनाए हुए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जुड़े सभी लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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