Report: A.K. Chaudhary
सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत गणपतगंज स्थित हरावत राज उच्च विद्यालय परिसर में रविवार को ग्राम रक्षा दल के सदस्यों की जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं अनुमंडलों से पहुंचे ग्राम रक्षा दल के पदाधिकारियों और सदस्यों ने आगामी प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर चर्चा की तथा जिला प्रशासन से वास्तविक ग्राम रक्षा दल के सदस्यों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण दिलाने की मांग की।

बैठक का मुख्य मुद्दा जिला पंचायत राज पदाधिकारी, सुपौल द्वारा ग्राम रक्षा दल महासंघ के प्रशिक्षण को लेकर जारी पत्र रहा। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और केवल वास्तविक (जेनुइन) ग्राम रक्षा दल के सदस्यों को ही इसका लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए थाना एवं संबंधित पंचायत स्तर पर जांच कर पात्र सदस्यों का चयन किया जाए।
बैठक को संबोधित करते हुए ग्राम रक्षा दल, सुपौल के जिलाध्यक्ष बजरंग कुमार ने कहा कि पूर्व में भी जिला पंचायत राज पदाधिकारी की ओर से प्रशिक्षण को लेकर पत्र जारी किया गया था, लेकिन अब तक प्रशिक्षण शुरू नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार के संयुक्त सचिव द्वारा ग्राम रक्षा दल महासंघ के प्रशिक्षण को लेकर निर्देश जारी किया गया था, जबकि दलपति व्यवस्था को पहले ही समाप्त कर दिया गया है। ऐसे में प्रशिक्षण केवल ग्राम रक्षा दल के वास्तविक सदस्यों को ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि ग्राम रक्षा दल के सदस्य प्रत्येक पर्व-त्योहार, विधि-व्यवस्था, सामाजिक आयोजनों तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों में थाना एवं पंचायत प्रशासन के साथ मिलकर अपनी सेवाएं देते हैं। विभिन्न अवसरों पर उनके कार्यों के लिए उन्हें प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए जाते रहे हैं। बावजूद इसके प्रशिक्षण प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं होने से सदस्यों में निराशा है।
बैठक में सर्वसम्मति से जिला पदाधिकारी एवं जिला पंचायत राज पदाधिकारी से मांग की गई कि ग्राम रक्षा दल के वास्तविक सदस्यों का थाना एवं पंचायत स्तर पर सत्यापन कराकर उन्हें शीघ्र प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि वे भविष्य में और बेहतर तरीके से प्रशासनिक एवं सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
बैठक में जिले के सभी अनुमंडलों एवं प्रखंडों के ग्राम रक्षा दल के अध्यक्ष एवं सदस्य उपस्थित रहे और प्रशिक्षण को लेकर एकजुट होकर अपनी मांग प्रशासन के समक्ष रखने का निर्णय लिया।







