
News Desk Patna:
कोसी नदी के दोनों तटबंधों के साथ फोरलेन सड़क निर्माण की बड़ी योजना पर काम शुरू हो गया है। प्रस्तावित परियोजना के तहत सुपौल जिले के वीरपुर से कटिहार जिले के कुरसेला और सुपौल जिले के वीरपुर से सहरसा जिले के कोपड़िया तक कुल करीब 354.37 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाई जाएगी। इस सड़क के निर्माण से कोसी क्षेत्र में आवागमन बेहतर होने के साथ-साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
योजना के मुताबिक पूर्वी तटबंध पर करीब 124 किलोमीटर और पश्चिमी तटबंध पर करीब 230 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। जल संसाधन विभाग की ओर से क्षेत्र का अध्ययन कराया जा चुका है और सड़क निर्माण से संबंधित प्रारंभिक कार्ययोजना भी तैयार की गई है।
तटबंधों का भी होगा सुदृढ़ीकरण
फोरलेन सड़क के निर्माण के साथ तटबंधों को ऊंचा और चौड़ा करने की योजना भी शामिल है। पूरी परियोजना के लिए लगभग 94,200 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई गई है। इसमें पूर्वी तटबंध की सड़क के लिए करीब 34,700 एकड़ और पश्चिमी तटबंध के लिए लगभग 59,500 एकड़ भूमि का उपयोग प्रस्तावित है।
पश्चिमी तटबंध की सड़क वीरपुर से शुरू होकर भारदा, कुनौली, घोघरडीहा, मधेपुर, मरौना, किरतपुर, अलौली, चौथम और नवगछिया होते हुए कुरसेला तक जाएगी। वहीं पूर्वी तटबंध की सड़क वीरपुर से बसंतपुर, सरायगढ़, किशनपुर, नौहट्टा, महिषी और सिमरी बख्तियारपुर होते हुए कोपड़िया तक प्रस्तावित है। कोपड़िया से कुरसेला के बीच की दूरी करीब 81 किलोमीटर है। इस हिस्से में सड़क निर्माण के लिए अलग से कार्ययोजना तैयार किए जाने की बात कही गई है।
आठ जिलों को मिलेगा फायदा
इस परियोजना का असर कोसी क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के कई जिलों पर पड़ेगा। प्रस्तावित फोरलेन सड़क से सुपौल, सहरसा, मधुबनी, दरभंगा, खगड़िया, भागलपुर, मधेपुरा और कटिहार समेत आठ जिलों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
सुपौल जिले में बसंतपुर, सरायगढ़-भपटियाही, किशनपुर, सुपौल, राघोपुर, निर्मली और मरौना क्षेत्र के लोगों को इससे सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सहरसा जिले के नौहट्टा, महिषी, सिमरी बख्तियारपुर, सलखुआ और कोपड़िया क्षेत्र भी परियोजना से जुड़ेंगे। इसी तरह मधुबनी के लौकही, घोघरडीहा और मधेपुर तथा दरभंगा के घनश्यामपुर और किरतपुर प्रखंड के लोगों को भी बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।
कई प्रमुख राजमार्गों से जुड़ेगा फोरलेन
प्रस्तावित फोरलेन सड़क को कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों और बड़े सड़क मार्गों से जोड़ने की योजना है। इसमें एनएच-27, एनएच-527ए, एनएच-231, एनएच-131 और एनएच-31 के अलावा गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी शामिल है। इसके बनने के बाद कोसी बैराज, सहरसा रेलवे स्टेशन, पूर्णिया एयरपोर्ट और कुरसेला गंगा संपर्क पथ तक पहुंच भी आसान होने की उम्मीद है। इसके अलावा आठों जिलों की स्थानीय और छोटी सड़कों को भी विभिन्न स्थानों पर प्रस्तावित फोरलेन से जोड़े जाने की योजना है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के विकास को मिलेगी गति
कोसी क्षेत्र में हर साल जलजमाव और बाढ़ के कारण कई इलाकों में आवागमन प्रभावित होता है। प्रस्तावित सड़क और तटबंधों के सुदृढ़ीकरण से ऐसे क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था मजबूत होने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह के अनुसार, कोसी नदी में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में योजना तैयार की जा रही है। उनका कहना है कि कोसी को केवल बाढ़ और परेशानी से जोड़कर देखने के बजाय क्षेत्र के विकास और समृद्धि का माध्यम बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से तटबंधों पर फोरलेन सड़क निर्माण की पहल शुरू की गई है।







