बाल संरक्षण को लेकर प्रखंड स्तरीय समिति की बैठक, पंचायत से वार्ड स्तर तक जिम्मेदारियां तय करने पर जोर

Report: A.K. Chaudhary

सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित टीसीपी भवन में शनिवार को प्रखंड स्तरीय बाल संरक्षण समिति की बैठक सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड प्रमुख फिदा हुसैन ने की। बैठक में बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों, समिति की संरचना एवं सदस्यों की भूमिका के साथ-साथ पंचायत और वार्ड स्तर पर बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में बीडीओ सत्येंद्र कुमार, सीडीपीओ लक्ष्मी रानी, एमओ अमर कुमार, चिकित्सा विभाग से डॉ. रौशन कुमार, कवच परियोजना के प्रशिक्षक संजीव कुमार, कवच परियोजना एवं समग्र शिक्षण एवं विकास संस्थान के ब्लॉक कॉर्डिनेटर रामविलास कुमार सहित विभिन्न पंचायतों के मुखिया, जनप्रतिनिधि, समिति के सदस्य एवं प्रखंड कर्मी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान प्रस्तुत दस्तावेज के माध्यम से बताया गया कि बाल संरक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए प्रखंड, पंचायत एवं वार्ड स्तर पर बाल संरक्षण समितियों का गठन किया जाता है। प्रखंड स्तरीय बाल संरक्षण समिति में प्रखंड प्रमुख अध्यक्ष तथा बीडीओ सह-अध्यक्ष की भूमिका में रहते हैं। इसके अलावा उप प्रमुख, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, ग्राम पंचायतों के मुखिया, पुलिस प्रतिनिधि, चिकित्सा, पंचायत राज, शिक्षा एवं श्रम विभाग के पदाधिकारियों समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों को समिति में शामिल किया जाता है।

प्रशिक्षण के दौरान पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति की संरचना और जिम्मेदारियों की भी जानकारी दी गई। पंचायत के मुखिया को समिति का अध्यक्ष तथा उप मुखिया को उपाध्यक्ष बनाया जाता है। आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिका, पंचायत सचिव, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य, स्कूल शिक्षक, एएनएम, विकास मित्र, आंगनबाड़ी सेविका तथा किशोर-किशोरी समूहों के प्रतिनिधियों सहित अन्य सदस्यों की भूमिका भी निर्धारित की गई है। इसी तरह वार्ड स्तर पर भी बाल संरक्षण समिति के माध्यम से बच्चों से जुड़े मामलों की पहचान और उनके संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम में बताया गया कि बाल श्रम, बाल विवाह, बच्चों के साथ हिंसा, शोषण, उपेक्षा अथवा अन्य किसी प्रकार की परेशानी की स्थिति में स्थानीय स्तर पर इसकी पहचान कर संबंधित विभाग एवं सक्षम प्राधिकार तक सूचना पहुंचाना बेहद जरूरी है। समिति के सदस्यों को बच्चों की सुरक्षा, अधिकार एवं उनके हित में समय पर कार्रवाई करने के लिए जागरूक किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते नए बीडीओ सत्येंद्र कुमार ने कहा कि बाल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। पंचायत प्रतिनिधियों, प्रशासन, पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी कर्मियों और समाज के सभी जिम्मेदार लोगों को मिलकर बच्चों के हित में काम करना होगा। उन्होंने कहा कि पंचायत और वार्ड स्तर पर समितियां सक्रिय रहेंगी तो बाल विवाह, बाल श्रम और बच्चों के साथ होने वाली हिंसा जैसी समस्याओं की समय रहते पहचान कर रोकथाम की जा सकेगी। उन्होंने सभी समिति सदस्यों से अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने और जरूरतमंद बच्चों तक सरकारी योजनाओं एवं संरक्षण की सुविधा पहुंचाने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं कर्मियों को बाल संरक्षण समिति की संरचना और उनके दायित्वों से अवगत कराया गया। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बाल संरक्षण की व्यवस्था को केवल कागज तक सीमित न रखते हुए पंचायत एवं वार्ड स्तर पर इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाए।

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