
Report: A.K. Chaudhary
मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में सदर अस्पताल, सुपौल में शुक्रवार को मिडवाइफरी लेड केयर यूनिट (MLCU) का शुभारंभ किया गया। जिलाधिकारी सावन कुमार ने फीता काटकर यूनिट का उद्घाटन किया। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. बाबू साहब झा, उपाधीक्षक डॉ. नूतन वर्मा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक बालकृष्ण चौधरी, अस्पताल प्रबंधक अभिनव आनंद सहित स्वास्थ्य विभाग एवं सहयोगी संस्थाओं Jhpiego, UNICEF और UNFPA के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मिडवाइफरी लेड केयर यूनिट में कम जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था, प्रसव और प्रसव के बाद प्रशिक्षित नर्स प्रैक्टिशनर इन मिडवाइफरी (NPM) की देखरेख में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के साथ ही मातृ एवं नवजात जटिलताओं की समय पर पहचान और प्रबंधन में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएम सावन कुमार ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं जिले के विकास की आधारशिला हैं। सदर अस्पताल में मिडवाइफरी यूनिट शुरू होने से गर्भवती महिलाओं को बेहतर एवं सम्मानजनक प्रसव सेवाएं मिलेंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के परिणामों में सकारात्मक सुधार आएगा।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि बिहार में मिडवाइफरी कार्यक्रम वर्ष 2019 से संचालित है। राज्य में चार स्टेट मिडवाइफरी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट कार्यरत हैं, जबकि 57 नर्स प्रैक्टिशनर इन मिडवाइफरी सेवाएं दे रही हैं और 98 प्रशिक्षु प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। राज्य के विभिन्न जिलों में 12 मिडवाइफरी लेड केयर यूनिट संचालित हैं। NPM का प्रशिक्षण 18 माह का होता है।
इसी कार्यक्रम में डीएम, सिविल सर्जन, उपाधीक्षक और जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने नौ नवनियुक्त ममता कर्मियों के बीच नियुक्ति पत्र वितरित किए। वहीं, राज्य स्वास्थ्य समिति के हब एंड स्पोक मॉडल के तहत संचालित लैब का भी शुभारंभ किया गया। इसके माध्यम से जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों के कुल 83 प्रकार की जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।







