सुपौल: राघोपुर रेलवे ढाला 15ए बंद होने के विरोध में हजारों लोगों का पैदल मार्च, डीएम के माध्यम से रेल मंत्री व उपमुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

Report: A.K. Chaudhary

सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत राघोपुर रेलवे ढाला गुमटी संख्या 15ए को बंद किए जाने के विरोध में बुधवार को स्थानीय लोगों का आक्रोश सड़क पर उतर आया। ढाला बंद होने से आवागमन, कारोबार, शिक्षा और स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ रहे कथित प्रभाव को लेकर व्यवसायियों, ग्रामीणों, समाजसेवियों, युवाओं, महिलाओं और पुरुषों समेत हजारों लोगों ने पैदल मार्च निकाला। लोगों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से रेलवे ढाला को पुनः खोलने की मांग की।

पैदल मार्च राघोपुर रेलवे ढाला गुमटी संख्या 15ए से शुरू हुआ। इसके बाद एनएच-131 स्थित आरओबी होते हुए सिमराही बाजार के जेपी चौक पहुंचे। यहां से पुनः एनएच-131 के रास्ते राघोपुर, विष्णु मंदिर होते हुए गणपतगंज पहुंचे, जहां पैदल मार्च का समापन किया गया। इस दौरान लोगों ने ढाला बंद होने से उत्पन्न समस्याओं को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

पैदल मार्च के बाद 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जिला पदाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से बिहार सरकार के उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, केंद्रीय पथ निर्माण मंत्री, केंद्रीय रेल मंत्री, डीआरएम तथा स्थानीय सांसद को भी ज्ञापन भेजकर रेलवे ढाला 15ए को खोलने की मांग की।

इस दौरान लोगों ने कहा है कि बीते मार्च महीने में राघोपुर रेलवे ढाला फाटक संख्या 15ए को स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद बंद कर दिया गया। इसके बाद राघोपुर बाजार सहित आसपास के कई बाजारों का कारोबार प्रभावित हुआ है। लोगों के अनुसार ढाला बंद होने से दोनों ओर की घनी आबादी के बीच आवागमन की दूरी बढ़ गई है और कई सरकारी संस्थानों, अस्पताल, स्कूल, बाजार तथा अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने में लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।

लोगों का कहना है कि राघोपुर मध्य विद्यालय, कॉलेज समेत आंगनबाड़ी केंद्रों का पोषक क्षेत्र भी इस रास्ते के बंद होने से दो हिस्सों में प्रभावित हुआ है। विद्यालय और आंगनबाड़ी जाने वाले छोटे बच्चों को अब आरओबी के रास्ते होकर आवागमन करना पड़ता है। इससे अभिभावकों के सामने बच्चों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर परेशानी बनी रहती है।

ढाला बंद होने से बाजार और रोजगार हुआ प्रभावित

इस दौरान लोगो ने कहा कि राघोपुर स्थित खुदरी हाट से सरकार को पहले प्रतिवर्ष लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता था। स्थानीय लोगों के अनुसार रेलवे ढाला बंद होने के बाद खुदरी हाट का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ा है।

व्यापारियों का कहना है कि ढाला बंद होने से दोनों तरफ के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही काफी कम हो गई है। राघोपुर रेलवे स्टेशन रोड, गणपतगंज की ओर जाने वाली सड़क तथा सिमराही बाजार की ओर जाने वाली सड़क के किनारे पहले कई दुकानों पर दिनभर ग्राहकों की भीड़ रहती थी। लोगों के अनुसार अब कई दुकानों में कारोबार ठप होने के कारण ताले लग चुके हैं।

स्थानीय लोगों ने कहा कि राघोपुर, हुलास, हरिपुर, धरहरा, चंपानगर, रामविशनपुर सहित नगर पंचायत सिमराही क्षेत्र के हजारों परिवारों की आजीविका इस बाजार और आसपास के कारोबार से जुड़ी है। आवेदन में 10 हजार से अधिक परिवारों के रोजगार प्रभावित होने का दावा किया गया है।

मंदिर और कब्रिस्तान जाने में भी बढ़ी दूरी

स्थानीय लोगों ने बताया कि रेलवे ढाला बंद होने का असर धार्मिक स्थलों तक पहुंचने पर भी पड़ा है। ढाला के दूसरी तरफ स्थित शिव मंदिर और कब्रिस्तान जाने के लिए लोगों को अब अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। लोगों के अनुसार पहले जहां आसपास के श्रद्धालु पांच से दस मिनट में मंदिर पहुंच जाते थे, वहीं अब उन्हें रास्ता बदलकर करीब आधे घंटे से एक घंटे तक का समय लग रहा है।

लोगों ने कहा कि ढाला बंद होने के बाद लोगों को आवाजाही में करीब तीन किलोमीटर तक की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। एनएच-131 पर आरओबी के कारण बड़े वाहनों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और आंगनबाड़ी के नौनिहालों के लिए सड़क पार करना भी मुश्किल हो गया है।

कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं होने का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे ढाला बंद होने के बाद इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय सांसद दिलेश्वर कामैत और निर्मली विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव से लिखित और मौखिक रूप से शिकायत की गई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इसी को लेकर बुधवार को लोगों ने सामूहिक रूप से पैदल मार्च निकालकर प्रशासन और सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया।

पैदल मार्च में शामिल लोगों ने बिहार सरकार के उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव समेत रेल विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि लोगों की परेशानी को देखते हुए गुमटी संख्या 15ए को पुनः खोला जाए अथवा स्थायी वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था की जाए, ताकि राघोपुर और आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन, रोजगार, शिक्षा और आवश्यक सेवाओं के लिए अतिरिक्त दूरी तय नहीं करनी पड़े।

मौके पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राघोपुर थाना पुलिस एवं रेल पुलिस बल मुस्तैद थे।

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