News Desk Patna:
बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में मंगलवार को एक बड़ी और कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली। विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने कार्य में लापरवाही, अनुशासनहीनता और सरकारी आदेशों की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए राज्य भर के 41 अंचलाधिकारियों (CO) और समकक्ष पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
हड़ताल बनी कार्रवाई की मुख्य वजह
दरअसल, राज्य के राजस्व अधिकारी पिछले दो महीनों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। अंचलाधिकारी और कानूनगो भी करीब एक महीने से कार्य बहिष्कार कर रहे थे, जिससे अंचल स्तर पर भूमि से जुड़े काम, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन और राजस्व वसूली पूरी तरह ठप हो गई थी।
सरकार द्वारा बार-बार काम पर लौटने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए गए, लेकिन अधिकारियों ने इन आदेशों की लगातार अनदेखी की। इससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
प्रशासनिक नियमावली के तहत कार्रवाई
स्थिति को गंभीर होते देख सरकार ने बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के तहत दंडात्मक कदम उठाया। इसके तहत 41 अधिकारियों को निलंबित कर स्पष्ट संदेश दिया गया कि सरकारी कामकाज बाधित करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
किन-किन अधिकारियों पर गिरी गाज
- रंजीत कुमार उपाध्याय – अंचलाधिकारी, मखदुमपुर, जहानाबाद
- पुष्कल कुमार – अंचलाधिकारी, पहाड़पुर, पूर्वी चंपारण
- रश्मि प्रिया – अंचलाधिकारी, राघोपुर, सुपौल
- मधुसुदन चौरसिया – अंचलाधिकारी, नोखा, रोहतास
- निकिता अग्रवाल – अंचलाधिकारी, नगर, पूर्णिया
- अर्चना कुमारी – अंचलाधिकारी, टेटिया बंबर, मुंगेर
- मोहित सिन्हा – अंचलाधिकारी, परवलपुर, नालंदा
- नजमुल हसन – अंचलाधिकारी, जोकीहाट, अररिया
- सुमन सौरभ – अंचलाधिकारी, हिसुआ, नवादा
- विवेक कुमार सिंह – अंचलाधिकारी, गौनाहा, पश्चिम चंपारण
- लखेंद्र कुमार – अंचलाधिकारी, पिरो, भोजपुर
- पुनीत कौशल – अंचलाधिकारी, खगड़िया सदर
- नरेन्द्र कुमार सिंह – अंचलाधिकारी, बाढ़, पटना
- अमित कुमार – अंचलाधिकारी, बेलदौर, खगड़िया
- विश्वास आनंद – अंचलाधिकारी, घाटकुसुम्बा, शेखपुरा
- शैलेन्द्र कुमार यादव – अंचलाधिकारी, दाउदनगर, औरंगाबाद
- गजानंद मेहता – अंचलाधिकारी, बेलागंज, गया प्रेम
- आनंद प्रसाद – अंचलाधिकारी, सोनभद्र बंसी सूर्यपुर, अरवल
- कुमार रोहित – अंचलाधिकारी, तरियानी, शिवहर
- संजीव कुमार – अंचलाधिकारी, पूर्णिया पूर्व, पूर्णिया
- विश्वजीत सिंह – अंचलाधिकारी, बोचहाँ, मुजफ्फरपुर
- मनीष कुमार – अंचलाधिकारी, बरारी, कटिहार
- उदयकांत मिश्र – अंचलाधिकारी, चौसा, मधेपुरा
- मोहित राज – अंचलाधिकारी, पोठिया, किशनगंज
- पंकज कुमार – अंचलाधिकारी, सिसवन, सिवान
- सतीश कुमार सिंह – अंचलाधिकारी, इसुआपुर,
- सारण प्रशांत कुमार झा – अंचलाधिकारी, झंझारपुर, मधुबनी
- रविकांत – अंचलाधिकारी, मनीगाछी, दरभंगा
- रविकांत – अंचलाधिकारी, लक्ष्मीपुर, जमुई
- राकेश आनंद – अंचलाधिकारी, बड़हिया, लखीसराय
- सतीश कुमार गुप्ता – अंचलाधिकारी, चाँद, कैमूर
- रंधीर रमण – अंचलाधिकारी, विभूतिपुर, समस्तीपुर
- नंदन कुमार – अंचलाधिकारी, चेरिया बरियारपुर, बेगूसराय
- विवेक कुमार मिश्रा – ADLAO, मधुबनी
- संजय कुमार – सहायक चकबंदी पदाधिकारी, भोजपुर
- सुधीर ओंकारा – राजस्व अधिकारी, मुख्यालय (HQ)
- आयुष चंद्र हंस – अंचलाधिकारी, एकंगरसराय, गोपालगंज
- राम विकास सिंह – राजस्व अधिकारी, जहानाबाद
- रजत कुमार बर्नवाल – अंचलाधिकारी, गोपालगंज
- सौरभ कुमार – अंचलाधिकारी, दावथ, रोहतास
- अमलेश कुमार – अंचलाधिकारी, एकमा, सारण यह सभी अधिकारी फिलहाल हड़ताल और कार्य बहिष्कार के कारण सरकार द्वारा निलंबित किए गए हैं।
क्या हैं राजस्व कर्मियों की मांगें
राजस्व सेवा से जुड़े अधिकारी लंबे समय से अपनी सेवा संबंधी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। उनकी मुख्य मांगों में: डीसीएलआर (DCLR) पद पर प्रोन्नति सेवा संरचना में सुधार पांच प्रमुख सेवा संबंधी सुविधाओं की बहाली राजस्व कर्मियों का कहना है कि उनकी मांगें न्यायसंगत हैं और वे लंबे समय से इन्हें उठा रहे हैं। उन्होंने सरकार से वार्ता की मांग भी की है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे।
महासंघ का सरकार पर सवाल
हड़ताल का नेतृत्व कर रहे बिहार राजस्व सेवा महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा। महासंघ ने सरकार से यह भी मांग की है कि उच्च न्यायालय के आदेश को लागू किया जाए और डीसीएलआर पद को राजस्व सेवा के अंतर्गत ही रखा जाए।
संघ का कहना है कि अन्य सेवाओं में पदों को समाहित करने से सेवा संरचना प्रभावित होगी और अधिकारियों की गरिमा कम होगी।
सरकार का सख्त रुख
वहीं सरकार इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाए हुए है। पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा पहले ही कई अंचलाधिकारियों पर कार्रवाई कर चुके हैं। सरकार का कहना है कि जनता के हितों को देखते हुए कामकाज बाधित करना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। आम जनता पर असर राजस्व कर्मियों की हड़ताल का सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है। जमीन से जुड़े काम जैसे दाखिल-खारिज, म्यूटेशन, प्रमाण पत्र और राजस्व वसूली जैसे जरूरी कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा परेशानी देखी जा रही है।







